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"पीड़िता ने अपनी आपबीती शब्दों और संकेतों में सुनाई": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन साल की लड़की के साथ बलात्कार के आरोपी 62 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया

LiveLaw News Network
4 May 2022 10:20 AM GMT
पीड़िता ने अपनी आपबीती शब्दों और संकेतों में सुनाई: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन साल की लड़की के साथ बलात्कार के आरोपी 62 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में तीन साल की बच्ची के साथ बलात्कार (Rape) के आरोपी 62 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया क्योंकि उसने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आरोपी ने 3 साल की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का अमानवीय कृत्य किया है।

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने यह भी कहा कि 3 वर्षीय पीड़ित लड़की ने शब्दों के साथ-साथ संकेतों में भी अपनी आपबीती सुनाई और कथित रूप से आरोपी द्वारा की गई बलात्कार की पूरी घटना को समझाया।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

"प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आवेदक ने तीन साल की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का अमानवीय कृत्य किया है। पीड़िता ने शब्दों के साथ-साथ संकेतों में भी अपनी आपबीती सुनाई है और बलात्कार की पूरी घटना को समझाया है। मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि पीड़िता का हाइमन फट गया है और उसके गुप्तांगों पर सूजन आ गई है। आवेदक, जिसने प्रथम दृष्टया तीन साल की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का जघन्य अपराध किया है, जमानत का हकदार नहीं है।"

अनिवार्य रूप से, आरोपी पर आईपीसी की धारा 376 और POCSO अधिनियम की धारा 5/6 के तहत मामला दर्ज किया गया। विशेष न्यायाधीश (POCSO अधिनियम) / अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा जून 2021 में उनकी जमानत याचिका को खारिज करने के बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि उसके खिलाफ आरोप यह है कि उसने 3 साल की लड़की के साथ बलात्कार का अपराध किया है।

अदालत ने यह भी देखा कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज अपने बयान में, पीड़िता ने शब्दों और कार्रवाई से यह भी बताया है कि आवेदक ने उसके साथ बलात्कार किया और उसके गुप्तांगों से खून बह रहा था।

आवेदक ने तर्क दिया कि प्राथमिकी दर्ज करने में लगभग पांच दिनों की देरी हुई और उसे वर्तमान मामले में झूठा फंसाया गया है क्योंकि वह पीड़ित के पिता के घर में बढ़ईगीरी का काम करता था और वेतन के भुगतान पर विवाद हुआ था। हालांकि, अदालत ने उसे जमानत देना उचित नहीं समझा।

केस का शीर्षक - सुनील बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एंड अन्य, क्रिमिनल MISC. जमानत आवेदन संख्या – 29765 ऑफ 2021

केस उद्धरण: 2022 लाइव लॉ 226

आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें:




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