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दिल्ली हिंसा : पीड़ितों के लिए मुआवजा बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता, हर्ष मंदर और अन्य ने सीएम केजरीवाल को पत्र लिखा

LiveLaw News Network
13 March 2020 4:45 PM GMT
दिल्ली हिंसा :  पीड़ितों के लिए मुआवजा बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता, हर्ष मंदर और अन्य ने सीएम केजरीवाल को पत्र लिखा
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखकर कर कुछ नागरिकों के एक समूह ने कहा है कि हाल ही में राजधानी को घेरने वाले दंगों के कारण हुई हिंसा में प्रभावित व्यक्तियों को दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।

फराह नकवी, अंजलि भारद्वाज, एनी राजा, हर्ष मंदर, अपूर्वानंद, अनिर्बान भट्टाचार्य और अमृता जौहरी द्वारा तैयार किए गए इस पत्र में दिल्ली के सीएम से आग्रह किया गया है कि दिल्ली की हिंसा में मारे गए लोगों के लिए मुआवजे की रकम को बढ़ाया जाए और इन दंगों से प्रभावित अन्य लोगों या जिंदा बचे हुए लोगों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत मुआवजा पैकेज में संशोधन किया जाए।

यह भी कहा गया है कि दिल्ली सरकार को उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरूप चलना चाहिए, जिसने 2013 के मुजफ्फरनगर हिंसा में मरने वालों को 13-13 लाख रूपये मुआवजा दिया था, इसलिए दिल्ली जैसे महानगर में रहने की उच्च लागत को ध्यान में रखते हुए,दिए गए मुआवजे की राशि को 25 लाख रूपये तक बढ़ाया जाना चाहिए।

पत्र में कहा गया है कि

''भारत में पहले की घटनाओं में हिंसा प्रभावित व्यक्तियों को दिए गए मुआवजे की राशि या मात्रा को ध्यान में रखते हुए और दिल्ली जैसे महानगर में रहने की उच्च लागत को समायोजित करने के लिए अन्य विषयों या हेड के तहत दिए जाने वाले मुआवजे की रकम को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।''

इसके अलावा, पत्र में यह भी कहा गया है कि मुआवजे की श्रेणियों में यौन हिंसा को भी शामिल किया जाना चाहिए। वहीं जीवन के सभी नुकसान भयानक है, इसलिए '' बालिग और नाबालिग'' होने के आधार पर मृत्यु के लिए दिए जाने वाले मुआवजे में अंतर नहीं होना चाहिए।

आधारभूत आकलन का हवाला देते हुए, इस पत्र में यह भी कहा गया है कि जीवित बचे लोगों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता है, जैसे कि श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं, किरायेदारों को रातोंरात घर से निकाल दिया गया है, साथ ही जिन लोगों की बीमा पॉलिसियां उनकी कार, बाइक और दंगों से नष्ट हुए अन्य सामान को कवर नहीं करती हैं।

व्यवस्थित सुझाव देते हुए और अपनी बात को दोहराते हुए, इस बात जोर दिया गया है कि बढ़े हुए मुआवजे को वास्तविक समय के आधार पर दिया जाना चाहिए।

''इन उद्यमों जैसे शोरूम, दुकानों, बेकरी इकाइयों, गोदामों, घर-आधारित काम, बिजली के स्पेयर-पार्ट इकाइयों, डाई करने वाली इकाइयों, सिलाई इकाइयां व अन्य को हुए नुकसान का जमीनी आकलन करने की आवश्यकता है और इनकी लागत की गणना मौजूदा बाजार दरों पर की जाए और उचित मुआवजा स्लैब निर्धारित किए गए हैं।''

सरकार को नए सिरे से आदेश जारी करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, पत्र में कहा गया है कि यह उचित होगा कि आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) को नए स्थानों पर पूर्ण पुनर्वास का अधिकार प्रदान किया जाए।

पत्र में यह भी कहा गया कि

''सरकार को आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) की श्रेणी को पहचानने के लिए एक आदेश जारी करना चाहिए, क्योंकि वे व्यक्ति अपने मूल निवास स्थान पर लौटने में असमर्थ हैं।''

इस पत्र में, अन्य बातों के साथ, सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह मुआवजे के समय-समय पर संवितरण की प्रक्रिया के लिए एक योजना तैयार करे क्योंकि ''प्रक्रिया पर बहुत उत्कंठा और भ्रम है।''

पत्र में, पीड़ितों को जीवित या सर्वाइवल राहत जारी करने की प्रासंगिक आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है और कहा गया है कि दंगों के 25,000 पीड़ितों को कोई मुआवजा नहीं मिला है, जबकि राजधानी में हुई हिंसा को दो सप्ताह का समय बीत चुका हैं।

पत्र पढ़ेंं




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