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'समझ में नहीं आ रहा है कि शादी में शामिल सभी लोगों को पुलिस स्टेशन क्यों लाया गया': त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सरकार को जिला मजिस्ट्रेट द्वारा विवाह समारोह को रोकने के मामले में जांच की अनुमति दी

LiveLaw News Network
6 May 2021 6:20 AM GMT
समझ में नहीं आ रहा है कि शादी में शामिल सभी लोगों को पुलिस स्टेशन क्यों लाया गया: त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सरकार को जिला मजिस्ट्रेट द्वारा विवाह समारोह को रोकने के मामले में जांच की अनुमति दी
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त्रिपुरा हाईकोर्ट ने गुरुवार (6 मई) को अगरतला में हुई घटना के वायरल वीडियो के संबंध में सरकार को एक बार फिर से जांच करने की अनुमति दी, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट और उनकी टीम ने विवाह समारोह को बीच में ही रोक दिया था।

चीफ ज‌स्ट‌िस अकील कुरैशी और जस्टिस एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने नोटिस जारी करने के साथ ही कई अंतरिम निर्देश जारी किए, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को अगरतला से बाहर भेजने का निर्देश भी शामिल है। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को इस मामले में एक बार फिर से जांच की अनुमति दी।

पीठ तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पहले एक वकील ने संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, दूसरा विवाह समारोह में आए पुजारी द्वारा याचिका दायर की गई थी और तीसरा दुल्हन के पिता द्वारा याचिका दायर की गई थी जो उस रात शादी में घटना के दौरान वहां मौजूद थे।

बेंच ने पिछली सुनवाई के दौरान नोटिस जारी करने के साथ ही कई अंतरिम निर्देश जारी किए, जिसमें डीएम को अगरतला से बाहर भेजने का निर्देश भी शामिल था। कोर्ट ने आगे कहा था कि घटना और उसमें डीएम की भूमिका की निष्पक्ष जांच के लिए ऐसा करना आवश्यक है।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच करने और घटना की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। 2 मई 2021 को डीएम को निलंबित भी कर दिया गया।

5 मई का कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने शुरुआत में कहा कि कार्यवाही में गंभीर मुद्दों में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिला मजिस्ट्रेट के निर्देशों के तहत 26 अप्रैल 2021 की रात को बड़ी संख्या में परिवार के सदस्य और शादी समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों को हिरासत में लिया गया था। काफी समय तक पुलिस स्टेशन में रखा गया था। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

हालांकि इस आरोप के जवाब में प्रतिवादी ने एक हलफनामा दायर किया जिसमें कहा कि किसी को भी गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया था।

यह तर्क दिया गया कि हॉल में उपस्थित सदस्यों को पुलिस स्टेशन में लाया गया क्योंकि कर्फ्यू के समय के बाद उनके पास रहने के लिए घर नहीं था और इसलिए, सुरक्षा प्रदान करने के लिए उन्हें पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन लाया गया और महिलाओं और बच्चों को महिला पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि,

"हम इस बात की सराहना करने में असमर्थ हैं कि अगर प्रशासन नागरिकों को एक सुरक्षित मार्ग प्रदान करना चाहते थे तो विवाह में शामिल लोगों या विवाह में आए बाहर के लोगों के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता कि महिलाओं और बच्चों सहित विवाह में शामिल सभी लोगों को पुलिस स्टेशन उठा लाया जाए। हम इस आरोप के बारे में पूछताछ करेंगे।"

कोर्ट ने इसके अलावा घटना की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए गंभीर आरोपों और दोनों पक्षकारों द्वारा लगाए गए आरोपों को देखते हुए कहा कि जांच समिति का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश को शामिल किया जा सके।

इस प्रकार निम्नलिखित आदेश दिए गए हैं;

1. त्रिपुरा सरकार के सचिव द्वारा पारित 28 अप्रैल 2021 के आदेश के तहत राज्य सरकार द्वारा गठित दो सदस्यीय जांच समिति में पूर्व जिला न्यायाधीश सुभाष सिकदर को शामिल किया जाए।

2. इस संबंध में एक औपचारिक आदेश कल सचिव द्वारा पारित किया जाएगा।

3. यह प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह जांच समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करें।

4. दिनांक 28.04.2021 के आदेश के अनुसार समिति का काम है कि वह समिति घटना की विस्तृत जांच करेगी और मामले में उठाए जाने वाले उपायों का सुझाव देगी।

5. पूरी घटना की जांच करते समय समिति याचिकाकर्ताओं के आरोप की भी जाच करेगी और इस संबंध में एक विशिष्ट रिपोर्ट बनाएगी।

6. जांच की रिपोर्ट को अदालत के समक्ष रखे बिना और न्यायालय की अनुमति के बिना प्रकाशित नहीं की जाएगी।

7. हम उम्मीद करेंगे कि लोग नई शिकायतों को दर्ज करके प्रशासन पर बोझ न डालें जब तक कि पहले से रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों के अलावा कुछ नया आरोप या एंगल प्रकाश में नहीं आता है।

कोर्ट ने अंत में कहा कि जब राज्य इस मुश्किल समय में कोरोनोवायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है तो ऐसे समय नियमों और विनियमों को लागू करने वाले व्यक्तियों को कानून का उल्लघंन नहीं करना चाहिए।

आदेश की कॉपी यहां पढ़ें:



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