त्विशा शर्मा दहेज हत्या मामला: पूर्व जज गिरिबाला सिंह को नहीं मिली जमानत, भोपाल कोर्ट ने याचिका खारिज की
Amir Ahmad
28 July 2026 4:48 PM IST

मॉडल और एक्ट्रेस त्विशा शर्मा की संदिग्ध दहेज मृत्यु के मामले में भोपाल कोर्ट ने रिटायर जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज की।
अदालत ने कहा कि केस डायरी में उनके कथित संलिप्त होने के पर्याप्त प्रथमदृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं और मामले की जांच अभी जारी है।
प्रथम अपर सेशन जज राम प्रताप मिश्रा ने अपने आदेश में कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा।
33 वर्षीय त्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु), धारा 85 (क्रूरता), धारा 3(5) (समान आशय) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया।
जमानत याचिका में गिरिबाला सिंह की ओर से कहा गया कि वह 2 जून 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन्होंने 35 वर्ष तक न्यायिक सेवा दी है और उनकी प्रतिष्ठित छवि रही है। साथ ही कहा गया कि वह जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष रह चुकी हैं और अपने दिवंगत पति की पेंशन भी प्राप्त करती थीं, इसलिए उनके द्वारा दहेज मांगने की संभावना नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना वाले दिन उनका मृतका से कोई संपर्क नहीं हुआ और उन्हें झूठा फंसाया गया। वॉयस सैंपल देने से शुरुआती इनकार को लेकर कहा गया कि वह अस्वस्थ थीं, लेकिन अदालत के निर्देश के बाद उन्होंने दूसरा वॉयस सैंपल उपलब्ध करा दिया।
वहीं, मृतका के माता-पिता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को मानसिक प्रताड़ना देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह भी कहा गया कि अपने वर्तमान और पूर्व पद के कारण वह प्रभावशाली हैं और जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।
CBI की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने दलील दी कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान आवेदिका स्वस्थ दिखाई दीं। अभियोजन ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का सामाजिक या प्रशासनिक पद यह साबित नहीं करता कि वह दहेज नहीं मांग सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने माना कि आवेदिका किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं हैं, जिससे जमानत का आधार बन सके। साथ ही कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे में इस चरण पर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई। जांच एजेंसी ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के मिलान के लिए आरोपियों के वॉयस सैंपल भी लिए हैं। इससे पहले भोपाल अदालत गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत कई बार बढ़ा चुकी है। उनके बेटे समर्थ सिंह को भी इस मामले में पहले अग्रिम जमानत नहीं मिली थी।
वहीं गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रद्द की थी।


