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तमिलनाडु के महाधिवक्ता विजय नारायण ने इस्तीफा दिया

LiveLaw News Network
4 May 2021 6:57 AM GMT
तमिलनाडु के महाधिवक्ता विजय नारायण ने इस्तीफा दिया
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तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (जिन्होंने आज राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को अपना इस्तीफा सौंप दिया है) को अपना इस्तीफा भेज दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि राज्य विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा से एक दिन पहले 1 मई को यह इस्तीफा भेजा गया था। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा क्यों दे दिया, तो उन्होंने जवाब दिया, "यही परंपरा रही है।"

मुख्यमंत्री को भेजे इस्तीफा में कहा गया है कि,

"जैसे ही मैं तमिलनाडु के लिए एडवोकेट जनरल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करता हूं, मेरे पास निजी प्रैक्टिस में लौटने का समय आ गया है। इस व्यक्तिगत कारण के चलते मैं तमिलनाडु के लिए एडवोकेट जनरल के पद से अपने इस्तीफा देना चाहता हूं।"

इसके आगे कहा गया,

"हालांकि मैंने राज्य के राजनीतिक इतिहास के दौरान थोड़ा अशांत समय पर काम किया, लेकिन मुझे उम्मीद है कि मैं अपने कार्यकाल के हर पल का आनंद ले सकूंगा। मुख्यमंत्री के साथ-साथ कानून मंत्री भी मेरे लिए बहुत बड़ी ताकत रहे और मेरे साथ अच्छा व्यवहार किया। इसके लिए मैं सदैव आभारी रहूंगा।''

उनके साथ सहयोग करने के लिए सभी सरकारी अधिकारियों को धन्यवाद देते हुए, पत्र में आगे जोड़ा गया है,

"तमिलनाडु में बेहद उम्दा अधिकारी हैं। उनका बहुत बड़ा प्रशासनिक अनुभव और अत्यधिक संवेदनशीलता के मामलों पर अमूल्य मार्गदर्शन विशेष रूप से सहायक है। मेरा व्यक्तिगत धन्यवाद भी महाधिवक्ता के कार्यालय में मेरे कर्मचारियों को जाता है। उन्होंने बहुत सहायता प्रदान की।"

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय नारायण के बारे में

आर. मुथुकुमारस्वामी के इस्तीफे के बाद वरिष्ठ वकील विजय नारायण को अगस्त 2017 में तमिलनाडु राज्य के महाधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया था।

नारायण प्रख्यात वकीलों और न्यायविदों के परिवार से आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता के छोटे भाई के. के. वेणुगोपाल भारत के वर्तमान अटॉर्नी जनरल हैं। इसके अलावा, उनके दादा वकील एम.के. नांबियार और उनके नाना सरदार के.एम. पणिक्कर, संविधान सभा के सदस्य रह चुके हैं।

वह स्वयं मद्रास बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वह अतीत में सेवा कानून, श्रम कानून, संवैधानिक कानून, प्रशासनिक कानून और वाणिज्यिक कानून पर मामलों सहित विभिन्न प्रकार के मामलों में शामिल रहे हैं।

1977 में लोयोला कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1978 में लॉ कॉलेज, मद्रास में दाखिला लिया और 1982 में स्नातक किया।

इसके बाद वह पी. चिदंबरम के चैंबर में शामिल हुए और उनके साथ तब तक काम किया जब तक वे सांसद नहीं बन गए। फिर उन्हें 2004 में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया।

इस्तीफा डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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