स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ POCSO की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज, स्पेशल कोर्ट के आदेश के घंटों बाद हुई कार्रवाई

Amir Ahmad

23 Feb 2026 3:48 PM IST

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ POCSO की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज, स्पेशल कोर्ट के आदेश के घंटों बाद हुई कार्रवाई

    उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) ने शनिवार देर रात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य के खिलाफ POCSO Act तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की। यह कार्रवाई प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों बाद की गई।

    FIR झूंसी थाने में रात 23:37 बजे दर्ज की गई। इससे पहले एडिशनल सेशन जस्टिस/स्पेशल जस्टिस (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया ने संबंधित थाना प्रभारी को मामला तत्काल दर्ज करने का निर्देश दिया।

    FIR में POCSO Act की धाराएं 3, 5(एल), 4(2), 6, 16, 17 और 51 लगाई गईं। धारा 5(एल) सहपठित धारा 6 के तहत बालक के साथ गंभीर प्रकृति के यौन उत्पीड़न के लिए न्यूनतम 20 वर्ष के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।

    यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दायर प्रार्थना पत्र पर पारित किया गया। आवेदन आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने प्रारंभिक लिखित शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।

    आवेदन में आरोप लगाया गया कि दो नाबालिग एक लगभग 14 वर्ष और दूसरी 17 वर्ष 6 माह की को माघ मेला 2025-26 के दौरान यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। शिकायत के अनुसार यह कृत्य धार्मिक सेवा और शिष्यत्व के नाम पर किए गए।

    अदालत ने पुलिस आयुक्त की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर विचार करते हुए कहा कि उपलब्ध सामग्री दो नाबालिगों के साथ गंभीर और विशिष्ट प्रकार के यौन उत्पीड़न के आरोप दर्शाती है। अदालत ने कहा कि पीड़ितों और आरोपियों की मेडिकल जांच, भौतिक साक्ष्यों का संकलन, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल सामग्री की जब्ती व फोरेंसिक परीक्षण मोबाइल लोकेशन की जांच तथा अन्य व्यक्तियों की पहचान जैसे कदम आवश्यक हैं।

    स्पेशल जज ने टिप्पणी की कि संज्ञेय अपराधों विशेषकर बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न जैसे मामलों की जांच राज्य का वैधानिक दायित्व है और इसे शिकायतकर्ता पर नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने निष्पक्ष, स्वतंत्र और त्वरित जांच के निर्देश दिए।

    FIR के अनुसार नाबालिगों को शिक्षा और सेवा के नाम पर गुरुकुल जैसे वातावरण में रखा गया जहां उनके साथ बार-बार यौन उत्पीड़न किया गया। शिकायत में आरोप है कि शिष्यों द्वारा दबाव बनाते हुए कहा गया,

    “यह गुरु-सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा।”

    इसके बाद उन्हें निर्वस्त्र सुलाने और यौन शोषण करने के आरोप लगाए गए।

    FIR में कहा गया कि कथित घटनाएं 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच विभिन्न अवसरों पर जिनमें माघ मेला भी शामिल है, हुईं।

    मामले की जांच अब पुलिस द्वारा की जा रही है।

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