राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या हुई 38 हुई
Amir Ahmad
12 Aug 2026 12:58 PM IST

राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 38 करने वाले सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अधिनियम 2026 को मंजूरी दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सहित जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो गई।
इस संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के अलावा 37 अन्य जज नियुक्त किए जा सकेंगे। इससे लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और संवैधानिक पीठों के गठन के कारण नियमित सुनवाई के काम पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
लोकसभा ने इस विधेयक को 3 अगस्त को मंजूरी दी थी। इसके बाद राज्यसभा ने भी इसे पारित कर दिया।
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत की पहल पर आगे बढ़ा।
कानून मंत्री के अनुसार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत ने 11 मई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था।
चीफ जस्टिस ने अपने पत्र में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में मामलों की बढ़ती संख्या के कारण रोजाना बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा करना आवश्यक है। हालांकि संविधान पीठों के गठन से नियमित मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है, क्योंकि संविधान पीठ में शामिल जजों को नियमित सुनवाई से अलग होना पड़ता है।
उन्होंने हाल में गठित नौ जजों की संविधान पीठ का उदाहरण भी दिया था, जो सबरीमाला मामले से संबंधित संदर्भ पर सुनवाई कर रही है। ऐसे मामलों के कारण नियमित मामलों की सुनवाई और निस्तारण की गति प्रभावित होती है। इसी को देखते हुए जजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था।
चीफ जस्टिस के पत्र के बाद केंद्र सरकार ने 17 मई को अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
अध्यादेश की जगह अब अधिनियम
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र में संशोधन विधेयक पेश किया था। इसका उद्देश्य राष्ट्रपति द्वारा जारी सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 का स्थान लेना था।
अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 की धारा 2 में संशोधन किया गया। इसमें 33 की जगह 37 का प्रावधान किया गया, जिससे CJI को शामिल करने पर कुल स्वीकृत संख्या 38 हो जाती है।
संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस और संसद द्वारा कानून के जरिए निर्धारित संख्या में अन्य जज होते हैं। इसलिए जजों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने के लिए संसद द्वारा कानून में संशोधन किया गया।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या 32 है, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भी शामिल हैं। नई व्यवस्था के बाद स्वीकृत संख्या 38 होने से भविष्य में छह और पदों पर नियुक्ति की जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या इससे पहले वर्ष 2019 में बढ़ाई गई थी। उस समय जजों की संख्या चीफ जस्टिस को छोड़कर 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।
अब 2026 के संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित कुल स्वीकृत पदों की संख्या 38 हो गई।


