Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

लॉकडाउन के दौरान धार्मिक आयोजन रोकने गई पुलिस पर पथराव : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुजारी को सीएम रिलीफ़ फंड में 10 हज़ार रुपए जमा करने की शर्त पर ज़मानत दी

LiveLaw News Network
14 May 2020 3:30 AM GMT
लॉकडाउन के दौरान धार्मिक आयोजन रोकने गई पुलिस पर पथराव : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुजारी को सीएम रिलीफ़ फंड में 10 हज़ार रुपए जमा करने की शर्त पर ज़मानत दी
x

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के सोलापुर में आयोजित एक धार्मिक समारोह में पूजा करने वाले एक 65 वर्षीय व्यक्ति को अंतरिम जमानत दे दी।

COVID 19 के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के उल्लंघन में ग्रामीणों की उपस्थिति में समारोह में भाग लेने के लिए एकत्र हुए थे, जहां इस व्यक्ति ने पूजा की थी।

कोर्ट ने इस व्यक्ति से जमानत की शर्त के तौर पर मुख्यमंत्री राहत कोष में 10,000 रुपये जमा करने को कहा।

न्यायमूर्ति साधना जाधव की बेंच सोलापुर के अक्कलकोट उत्तर पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज शिवपुरा अनाराय श्रीगण द्वारा दायर जमानत की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी।

यह था मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट, सोलापुर ने 2 मार्च को सीआरपीसी की धारा 144 के तहत एक निषेधाज्ञा पारित की थी। हालांकि, 29 मार्च को, गांव वागदरी में भगवान परमेश्वर का मेला आयोजित किया गया था। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत भले ही पुलिस ने ग्रामीणों से इकट्ठा न होने का अनुरोध किया था, लेकिन ग्रामीणों ने तर्क दिया कि मंदिर में इकट्ठा होना उनकी प्रथा है।

पुलिस भीड़ को समझाने की कोशिश कर रही थी, हालांकि, मौजूद लोगों ने उसी का विरोध किया, आवाज उठाई और पुलिस पर पथराव किया।

30 मार्च को पुलिस निरीक्षक ने भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 332, 333, 143, 147, 149, 186, 188, 269, 270, 504, 506 के तहत दंडनीय अपराधों में पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई।

साथ ही महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1) सह पठित धारा 135 और धारा 139 और महामारी रोग अधिनियम की धारा 2, 3 और 4 के तहत तथा महाराष्ट्र COVID 19 नियम 11 के तहत के साथ कुछ आरोपियों को अक्कलकोट उत्तर पुलिस स्टेशन ने गिरफ्तार किया था।

आवेदक के वकील विक्रांत फाटे के अनुसार, उनके क्लाइंट को पंच समिति ने भगवान को ले जाने वाले रथ की पूजा करने के लिए बुलाया था और आवेदक को मंदिर की पंच समिति ने बाध्य किया।

जस्टिस जाधव ने कहा,

"प्रथम दृष्टया यह दिखाने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि आवेदक ने पुलिस से झगड़ा किया था या पुलिस पर पथराव किया था। प्रथम दृष्टया यह इंगित करने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि हिरासत में पूछताछ की गई है।

आवेदक की उम्र को ध्यान में रखते हुए तथा इस तथ्य के साथ कि आवेदक को प्रत्यक्ष तौर पर कोई कार्य नहीं सौंपा गया था, आवेदक अन्य शर्तों को चुनने पर अंतरिम राहत के हकदार है। "

इस प्रकार अंतरिम राहत प्रदान करते हुए, न्यायालय ने फैसला सुनाया कि 15,000 रुपये का बॉन्ड प्रस्तुत करने पर और 8 सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री राहत कोष में 10,000 रुपए जमा कराने की शर्त पर आवेदक की जमानत अर्जी स्वीकार की जाती है।

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




Next Story