'सीएम को थप्पड़ मारने' की टिप्पणी का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को दो सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की

  • सीएम को थप्पड़ मारने की टिप्पणी का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को दो सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ उनकी 'थप्पड़' वाली टिप्पणी पर धुले में दर्ज एफआईआर में दो सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।

    महाराष्ट्र सरकार द्वारा बयान देने से इनकार करने और मंत्री के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के बाद अदालत ने राणे को उक्त सुरक्षा प्रदान की। इन दो हफ्तों के भीतर राणे या तो अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं या एफआईआर के हस्तांतरण की मांग कर सकते हैं।

    जस्टिस पीबी वराले और जस्टिस एसएम मोदक की खंडपीठ 24 अगस्त, 2021 को धुले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (बी) (1) (सी), 500 और 505 (2) के तहत दर्ज एफआईआर को खिलाफ करने की मांव वाली राणे की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    रायगढ़ में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान राणे के कथित अभद्र भाषा के बारे में शिवसेना के एक सदस्य की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की आलोचना की थी।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में कई एफआईआर दर्ज की गईं, जिसमें राणे ने मुख्यमंत्री के लिए 'थप्पड़' वाली टिप्पणी की। इससे पहले, एक अलग याचिका में राज्य ने इनमें से कम से कम एक एफआईआर में राणे को गिरफ्तार नहीं करने का बयान देने पर सहमति जताई थी।

    पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की और राज्य से पूछा कि क्या वे धुले में दर्ज एफआईआर में भी ऐसा ही बयान देंगे, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।

    सुनवाई के दौरान जज ने महाराष्ट्र की विरासत से संबंधित कुछ घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब दो वरिष्ठ नेता एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे और उनमें से एक अपने बच्चों को दूसरे के साथ छोड़ना था।

    जस्टिस वरले ने कहा,

    "हालांकि यह एक क्षेत्राधिकार नहीं है, याचिकाकर्ता एक जिम्मेदार पद पर है। लेकिन निश्चित रूप से इस्तेमाल किए गए शब्दों का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ सम्मानजनक रूप से नहीं किया जाता है, जो एक सम्मानजनक पद पर है। याचिकाकर्ता अदालत में आगे क्यों नहीं आता और बयान देता है कि जो बीत गया उसे बीत जाने दो। आइए सभी के प्रति सम्मानजनक होने का निर्णय लें। आइए लोगों को गलत संकेत न दें।"

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन गरिमा को बनाए रखा जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा,

    "आइए हम अपने युवाओं को एक अच्छा उदाहरण दें। राजनीतिक जीवन में ऐसा होता है, कोई एक विचारधारा को अपनाता है और कोई दूसरी विचारधारा को अपनाता है, उनकी अपनी पसंद और नापसंद होती है।"

    राणे ने अपनी याचिका में कहा कि उनका कभी भी समुदायों के बीच या मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी भी तरह की नफरत पैदा करने या बढ़ावा देने का कोई इरादा नहीं था जैसा कि आरोप लगाया गया है।

    अधिवक्ता अनिकेत निकम और गजानन शिंदे के माध्यम से दायर राणे की याचिका में तर्क दिया गया कि "झूठी" पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) एक राजनीतिक प्रतिशोध है।

    उनकी याचिका में कहा गया,

    "एक ही बयान के लिए उनके खिलाफ विभिन्न पुलिस स्टेशनों में अपराध दर्ज करना और कुछ नहीं, उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित करना है।''

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