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'गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की गंभीर निंदा आवश्यक', पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मेडिकल कर्मचारियों को कमरे में बंद करने की आरोपी महिला को अग्रिम-ज़मानत देने से इनकार किया

SPARSH UPADHYAY
22 Aug 2020 4:00 AM GMT
गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की गंभीर निंदा आवश्यक, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मेडिकल कर्मचारियों को कमरे में बंद करने की आरोपी महिला को अग्रिम-ज़मानत देने से इनकार किया
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पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार (19 अगस्त) को एक महिला को गिरफ्तारी- पूर्व जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया। दरअसल, इस महिला ने मेडिकल/पैरा-मेडिकल के कुछ कर्मचारियों और उनकी टीम के कुछ सदस्यों को एक कमरे के अंदर बंद कर दिया था और उसके बाद 'XXXX' के शव को मुर्दाघर से हटा दिया था।

न्यायमूर्ति तेजिंदर सिंह ढींडसा की पीठ ने संदीप कौर की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई की, जिस महिला के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 297, 454, 353, 186, 342, 270, 120-B & 188 IPC, सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम की क्षति की रोकथाम अधिनियम, 1984 की धारा 4 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51, के तहत पुलिस स्टेशन सिटी बरनाला में आपराधिक मामला पंजीकृत किया गया है।

प्रारंभ में, याचिकाकर्ता के वकील द्वारा यह तर्क दिया गया था कि याचिकाकर्ता उस व्यक्ति से संबंधित नहीं है, जिसका शरीर शवगृह से बाहर ले जाया गया था और अज्ञात और असंबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

हालाँकि, उसके बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने खुद अदालत के समक्ष यह प्रस्तुत किया कि 'XXXX', जिसका शव मुर्दाघर से हटा दिया गया था, वह याचिकाकर्ता का चचेरा भाई है।

मामले की सुनवाई की पिछली तारीख को, राज्य के वकील को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए निर्देशित किया गया था, क्योंकि इस मामले में एक महिला को अभियुक्त के रूप में आरोपित किया जा रहा था।

आखिरकार, राज्य की ओर से एक उत्तर, ई-मेल के माध्यम से अदालत को प्राप्त हुआ। अदालत ने कहा कि राज्य के जवाब के अनुसार, घटना की एक वीडियो क्लिप दर्ज की गई थी और जिसमें मौजूदा याचिकाकर्ता की विधिवत पहचान की गई थी।

न्यायालय का अवलोकन

अदालत ने यह देखा,

"मौजूदा COVID -19 महामारी के दौरान, किसी भी व्यक्ति की गैर-जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करने की हरकत की गंभीर शब्दों में निंदा करने की आवश्यकता है। देश भर में और पंजाब राज्य में चिकित्सा और पैरा-मेडिकल कर्मचारी इस महामारी से लड़ने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।"

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि,

"COVID परीक्षण' के संचालन के संबंध में एक निश्चित प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए और 'COVID' की मृत्यु होने की स्थिति में; कुछ एहतियाती उपायों का पालन करना होता है।"

इसके अलावा, आरोपों के अनुसार, पीठ ने कहा कि वर्तमान याचिकाकर्ता एक समूह का हिस्सा थीं, जिसने शव को शवगृह से हटा दिया था और जो शव उसके चचेरे भाई का था।

अदालत ने यह भी अवलोकन किया कि अन्वेषण एजेंसी के अनुसार, बॉडी को हटाते समय याचिकाकर्ता की उपस्थिति सीसीटीवी फुटेज में दर्ज है। ऐसी परिस्थितियों में, अग्रिम जमानत की रियायत की मांग करने वाले याचिकाकर्ता की प्रार्थना को उच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार नहीं किया गया।

यह ध्यान दिया जा सकता है कि हाल ही में त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने डॉक्टरों और पैरा-मेडिकल कर्मचारियों सभी संबंधित व्यक्तियों, जो महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर रहे हैं, के विश्वास को बहाल करने के लिए सरकार को निर्देश देते हुए यह देखा था कि डॉक्टर, देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं

न्यायमूर्ति अरिंदम लोध ने यह टिप्पणी उस मामले में की जहाँ एक डॉक्टर के खिलाफ रोगियों के एक समूह द्वारा विरोध का सदस्य होने के आरोपित एक व्यक्ति द्वारा अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका दायर की गयी थी।

न्यायाधीश ने अन्वेषण अधिकारी को डॉक्टर के बयान को रिकॉर्ड करने और एक परीक्षण पहचान परेड आयोजित करने का निर्देश दिया।

आदेश की कॉपी डाउनलोड करें



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