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"शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है": कोर्ट ने हत्या के आरोपी को एनएलयू-दिल्ली एंट्रेंस एग्जाम में बैठने की अनुमति दी

Brij Nandan
23 Jun 2022 9:20 AM GMT
शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है: कोर्ट ने हत्या के आरोपी को एनएलयू-दिल्ली एंट्रेंस एग्जाम में बैठने की अनुमति दी
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दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने हत्या के आरोपी को 26 जून को होने वाली नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU), दिल्ली द्वारा आयोजित ऑल इंडिया लॉ एंट्रेंस टेस्ट, 2022 में बैठने की अनुमति दी।

कोर्ट ने देखा कि शिक्षा प्राप्त करना एक मौलिक अधिकार है।

राउज एवेन्यू कोर्ट के अवकाश जज चंद्रशेखर ने इस प्रकार एक शशांक जादोन द्वारा दायर आवेदन को एंट्रेंस एग्जाम में बैठने की अनुमति दी, यह देखते हुए कि उसके द्वारा वर्ष 2020 में किए गए इसी तरह के अनुरोध को संबंधित अदालत द्वारा अनुमति दी गई थी।

जादोन सीबीआई के एक मामले में आरोपी है, जिसके लिए वर्ष 2015 में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अदालत ने कहा,

"इसलिए, संबंधित अधीक्षक जेल, दासाना जेल को निर्देश दिया जाता है कि अभियुक्तों की उक्त परीक्षा में उचित समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए, जैसा कि इस आदेश और प्रवेश पत्र की प्रति में वर्णित है।"

कोर्ट ने कहा कि जेल अधीक्षक आरोपी को एडमिट कार्ड में "उम्मीदवारों को निर्देश" शीर्षक के तहत आवश्यक दस्तावेज या सामान ले जाने की अनुमति देगा।

अदालत ने आदेश दिया,

"यह देखा गया है कि कानून के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और न्यायिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपी द्वारा वर्ष 2020 में किए गए इसी तरह के अनुरोध को संबंधित अदालत द्वारा दिनांक 19.09.2020 के आदेश के तहत अनुमति दी गई थी। इसलिए, ऐसा लगता है कि यह न्याय के हित में है अगर आरोपी को 26.06.2022 को लॉयड लॉ कॉलेज में सुबह 10:00 बजे से 11:30 बजे के बीच आयोजित होने वाली अखिल भारतीय विधि प्रवेश परीक्षा में उपस्थित होने की अनुमति दी जाती है।"

कोर्ट ने संबंधित जेल अधीक्षक को 28 जून को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें:





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