राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में बड़ा बदलाव, दो साल तक विलंबित पंजीकरण के लिए अब अदालत जाने की जरूरत नहीं
Amir Ahmad
7 Aug 2026 1:26 PM IST

राष्ट्रपति ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 को अपनी मंजूरी दी। इस संशोधन के साथ जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया। अब यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है तो उसके पंजीकरण के लिए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों का निस्तारण अब जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट करेंगे।
यह कानून संसद के दोनों सदनों से पिछले सप्ताह पारित हुआ था। हालांकि, इसके प्रावधान केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने की तिथि से लागू होंगे।
संशोधन के तहत जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में बदलाव किया गया। नए प्रावधान के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है तो संबंधित क्षेत्राधिकार वाले जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट पहले तथ्यों का सत्यापन करेंगे। सत्यापन संतोषजनक पाए जाने पर वे पंजीकरण का आदेश जारी करेंगे। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी देना होगा।
संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट से आशय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14(1) के तहत नियुक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट से है।
हालांकि, दो वर्ष से अधिक की देरी से जन्म या मृत्यु की सूचना दिए जाने पर पहले की तरह ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी का आदेश अनिवार्य रहेगा। ऐसे मामलों में भी मजिस्ट्रेट को पहले घटना की सत्यता का सत्यापन करना होगा और निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद ही पंजीकरण का आदेश दिया जाएगा।
अब तक की व्यवस्था में जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक की देरी से दिए जाने पर हर मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अनुमति आवश्यक थी। नए संशोधन के बाद एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी वाले मामलों का अधिकार न्यायपालिका से कार्यपालिका को सौंप दिया गया, जबकि दो वर्ष से अधिक की देरी वाले मामलों में न्यायिक जांच और अनुमति की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।


