समाज के लिए खतरा: ओडिशा कोर्ट ने 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को सुनाई फांसी की सजा
Amir Ahmad
13 April 2026 12:21 PM IST

ओडिशा के अनुगुल स्पेशल जिला कोर्ट ने मार्च 2025 में एक चार साल की मासूम बच्ची के साथ जघन्य दुष्कर्म और उसकी हत्या के दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई। शुक्रवार (10 अप्रैल) को अपना फैसला सुनाते हुए POCSO Act के तहत गठित विशेष अदालत की जस्टिस सौम्या सुभदर्शिनी ने इस कृत्य को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की कि बच्चों के साथ दुष्कर्म के मामले विकृत यौन इच्छाओं का परिणाम हैं, जहां अपनी हवस के लिए मासूमों तक को नहीं बख्शा जाता।
जस्टिस ने कहा,
"यह अपराध अत्यंत क्रूरता के साथ किया गया और इसने समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया। अपराधी समाज के लिए एक खतरा है। यह मामला दुर्लभतम से दुर्लभ श्रेणी में आता है।"
यह मामला 13 मार्च, 2025 का है, जब 4 साल 10 महीने की बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। दोपहर में बच्ची के अचानक लापता होने के बाद 15 मार्च की सुबह उसका शव घर से महज 200 मीटर दूर बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची की मौत गला घोंटने के कारण हुई। रिपोर्ट में निजी अंगों पर गहरी चोटों और बर्बरता की पुष्टि हुई।
पुलिस ने एक महीने से भी कम समय में आरोपी बाबूला जेना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO Act की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।
हालांकि, मामला पूरी तरह से परिस्थितियों पर आधारित साक्ष्यों पर टिका था लेकिन अभियोजन पक्ष ने तीन महत्वपूर्ण कड़ियों से अपना मामला साबित किया:
1. अंतिम बार देखे जाने का सिद्धांत: गवाहों ने आरोपी को बच्ची के साथ अंतिम बार देखा था। कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति में आरोपी की जिम्मेदारी थी कि वह बताए कि बच्ची की मौत कैसे हुई।
2. अपराध की स्वीकारोक्ति: आरोपी ने बच्ची की तलाश के दौरान ही ग्रामीणों के सामने यह कह दिया था कि बच्ची अब जीवित नहीं है जिससे उस पर शक हुआ। बाद में उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल किया और बच्ची के पायल व मोबाइल बरामद करवाए।
3. वैज्ञानिक साक्ष्य: आरोपी के कपड़ों पर मिले खून के धब्बों का मिलान बच्ची के डीएनए (DNA) प्रोफाइल से हो गया जिसका आरोपी के पास कोई जवाब नहीं था।
अदालत ने आरोपी को हत्या और गंभीर यौन शोषण के लिए दोषी पाया। हालांकि जेल रिपोर्ट में आरोपी का व्यवहार अच्छा बताया गया लेकिन अपराध की भयंकर क्रूरता को देखते हुए अदालत ने फांसी की सजा देना ही उचित समझा।
सजा के साथ-साथ अदालत ने पीड़ित माता-पिता के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे का भी आदेश दिया, जिन्होंने अपनी इकलौती संतान को खो दिया है। यह राशि दोषियों से वसूले गए जुर्माने के अतिरिक्त होगी।

