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राजस्थान हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में 3 मई तक होगा सीमित कामकाज, वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग और ई फाइलिंग के लिए नए दिशानिर्देश

LiveLaw News Network
15 April 2020 9:58 AM GMT
राजस्थान हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में 3 मई तक होगा सीमित कामकाज, वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग और ई फाइलिंग के लिए नए दिशानिर्देश
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राष्ट्रव्यापी स्तर पर लॉकडाउन का एक बार फिर विस्तार होने के कारण राजस्‍थान हाईकोर्ट ने अदालती कामकाज सीमित रखने के फैसले को जारी रखा है। 3 मई तक राजस्‍थान हाईकोर्ट समेत सभी निचली अदालतों में सीमित कामकाज होगा।

साथ ही, 15 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच सूचीबद्ध मामलों को 6 मई से 26 मई, 2020 के बीच सूचीबद्ध करने के लिए स्थगित कर दिया गया है। इसके अलावा, याचिका / आवेदन / मुकदमा/ अपील और अन्य कार्यवाहियों को दायर करने की सीमा को, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर, 15 मार्च, 2020 तक या अगले आदेश तक बढ़ा दिया गया है।

इस अवधि में समाप्त होने वाले सभी अंतरिम आदेशों को भी तब तक के लिए बढ़ा दिया गया है, जब तक कि मामला नियमित अदालत द्वारा उठाया नहीं जाता है। इस आशय की एक अधिसूचना में रजिस्ट्रार जनरल ने ई-फाइलिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के संबंध में विस्तृत निर्देश भी जारी किए हैं।

निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए हैं-

-जोधपुर और जयपुर बेंच में डिवीजन और सिंगल बेंच का गठन केवल बेहद जरूरी मामलों की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश द्वारा किया जाएगा, जो सुबह 11.00 बजे से दोपहर 01.00 बजे के बीच होगा।

-अत्यधिक आग्रह के मामलों को रजिस्ट्रारों द्वारा निर्धारित किया जाएगा, जैसा कि निर्धारित है, ऐसे मामलों में वकीलों को, प्रतिदिन 10.30 से 12.00 बजे के बीच, अपने विपक्षी वकील को ईमेल / व्हाट्सएप / हाईकोर्ट की वेबसाइट के जरिए सूच‌ित करने के बाद निर्धारित प्रारूप में 'अनुरोध पर्ची' जमा करना होगा, जिसके बाद उस अनुरोध का निर्धारण किया जाएगा।

-सभी लंबित जमानत आवेदनों को उल्लेख किए बिना संबंधित पीठों के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

-काउंटर दाखिल करने के लिए केवल एक वकील या उसके क्‍लर्क को अनुमति दी जाएगी।

-उसी के लिए जारी अधिसूचना के संदर्भ में ई-फाइलिंग के माध्यम से बेहद जरूरी मामलों की ताजा फाइलिंग की जा सकती है।

-इस शर्त के साथ ईमेल के माध्यम से अर्जेंट फाइलिंग भी किया जा सकता है कि नियमित कामकाज शुरू होने पर हार्ड कॉपी जमा की जाएगी।

-यदि आवश्यक हो, तो पक्षकार या वकील एक आवेदन कर सकता है, जिसमें मौजूदा परिस्थितियों में विधिवत रूप से हलफनामा दाखिल करने से छूट की मांग की जा सकती है, साथ में एक अंडरटेकिंग दी जाए कि बकाया अदालत फीस का भुगतान बाद में किया जाएगा।

-वकील ईमेल के माध्यम से जिरह के नोट्स प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसके अलावा, जिरह 'Jitsi Meet' एप्लिकेशन पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए भी किए जा सकते हैं। यदि वीडियो कॉन्फ्रेंस ऐप के माध्यम से नहीं हो पा रही है तो व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से की जाएगी।

-लिखित उल्लेख और प्रस्तुतियों पर विचार करने के ‌लिए मामला बिना किसी प्रतिकूल आदेश के स्‍‌थगित कर दिया जाएगा। यदि प्रभावी सुनवाई हो गई है तो यह खंड लागू नहीं होगा।

उच्च न्यायालय ने राज्य में सभी अधीनस्थ न्यायालयों / विशेष न्यायालयों / न्यायाधिकरणों के लिए भी विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।

अधिसूचना के अनुसार, राजस्थान की अधीनस्थ अदालतें 3 मई, 2020 तक केवल बेहद जरूरी मामलों को ही उठाएंगी और अन्य सभी मामलों को अगले दिशा-निर्देशों तक के लिए स्‍थगित किया गया है:

-जमानत के संबंध में विशेष अधिनियमों के तहत जमानत आवेदन, अपील

-रिमांड के मामले

-निषेधाज्ञा/ स्‍थगन

-सुपुर्दगी

-धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान, मरने की घोषणा सहित।

-किसी अन्य अर्जेंट मामले पर जिला न्यायाधीश द्वारा प्रतिनियुक्त संबंधित पीठासीन अधिकारी द्वारा निर्णय लिया जाएगा,

अत्यंत आवश्यक मामलों को वीडियो / व्हाट्सएप / स्काइप द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के जर‌िए अर्जेंट कार्यों के लिए प्रतिनियुक्त पीठासीन अधिकारियों द्वारा केवल 02.00 बजे से 04.00 बजे के बीच सुना जाएगा। हाईकोर्ट ने अदालत परिसरों में भीड़ कम करने के लिए भी ‌निर्देश जारी किया है।

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