नाबालिग का हाथ चूमकर गाल पर चुंबन मांगना यौन उत्पीड़न: ओडिशा स्पेशल कोर्ट ने सुनाई एक साल की सजा

Amir Ahmad

18 July 2026 12:22 PM IST

  • नाबालिग का हाथ चूमकर गाल पर चुंबन मांगना यौन उत्पीड़न: ओडिशा स्पेशल कोर्ट ने सुनाई एक साल की सजा

    ओडिशा के संबलपुर स्थित POCSO स्पेशल कोर्ट ने नाबालिग लड़की का हाथ पकड़कर उसे चूमने और बदले में अपने गाल पर चुंबन मांगने वाले व्यक्ति को POCSO Act के तहत यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

    अतिरिक्त सत्र जज एवं विशेष जज (POCSO) सौम्यक पात्र ने कहा कि आरोपी की हरकतों से उसका स्पष्ट यौन आशय सामने आता है और यह POCSO Act की धारा 12 के तहत यौन उत्पीड़न की परिभाषा में आता है।

    अदालत ने कहा,

    "पीड़िता का हाथ पकड़ना, उसे चूमना, अजीब तरीके से उसकी ओर देखना और फिर अपने गाल पर चुंबन देने के लिए कहना स्पष्ट रूप से यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। इन कृत्यों का तरीका ही आरोपी के यौन आशय को स्पष्ट करता है।"

    मामले के अनुसार 14 अप्रैल 2024 को आरोपी कपड़े लेने के बहाने नाबालिग के घर पहुंचा।

    आरोप है कि उसने लड़की का हाथ पकड़कर उसे चूमा फिर उससे अपने गाल पर चुंबन देने की जिद की और उसका मोबाइल नंबर भी मांगा। इससे घबराकर नाबालिग ने दरवाजा बंद कर लिया।

    घटना की जानकारी मिलने पर पीड़िता के पिता ने FIR दर्ज कराई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पहले प्रभावी भारतीय दंड संहिता की धारा 354-ए तथा POCSO Act की धारा 12 सहित अन्य प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्कूल के एडमिशन रजिस्टर में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर माना कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग है।

    पीड़िता ने अदालत में बताया कि आरोपी ने उसका हाथ चूमते हुए उससे कहा,

    "तू बहुत सुंदर दिख रही है।"

    उसके बयान की पुष्टि उसके माता-पिता ने भी की। उन्होंने अदालत को बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने आरोपी को बुलाकर पूछताछ की जहां उसने कथित रूप से अपनी हरकत स्वीकार की।

    बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि FIR में हाथ चूमने का उल्लेख नहीं था और गवाहों के बयानों में यह अंतर है कि किसी ने दाहिने हाथ तो किसी ने बाएं हाथ को चूमने की बात कही है।

    अदालत ने कहा कि ऐसी मामूली विसंगतियां स्वाभाविक हैं और इससे पीड़िता की विश्वसनीय गवाही प्रभावित नहीं होती।

    अदालत ने यह भी खारिज किया कि आरोपी को अलग धर्म का होने के कारण झूठा फंसाया गया। साथ ही यह दलील भी स्वीकार नहीं की कि घटना वाले दिन धार्मिक कारणों से वह घर से बाहर ही नहीं निकला था।

    सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद विशेष अदालत ने आरोपी को POCSO Act की धारा 12 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-ए के तहत दोषी ठहराया। हालांकि आपराधिक अतिक्रमण के आरोप से उसे बरी कर दिया।

    अदालत ने आरोपी को एक वर्ष के कठोर कारावास तथा 5,000 रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि POCSO Act के प्रावधानों के अनुसार भारतीय दंड संहिता की धारा 354-ए के लिए अलग से सजा देने की आवश्यकता नहीं है।

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