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पराठा नहीं है 'रोटी' की तरह खाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थ : एएआर कर्नाटक ने दिया पराठे पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने का आदेश

LiveLaw News Network
13 Jun 2020 3:30 AM GMT
पराठा नहीं है रोटी की तरह खाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थ : एएआर कर्नाटक ने दिया पराठे पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने का आदेश
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''रोटी''और '' पराठे'' के बीच अंतर करते हुए ऑथिरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएआर) कर्नाटक ने माना है कि पराठे को ''पूरी तरह से पके हुए भोजन''के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए उस पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जा रहा है।

डॉ रवि प्रसाद एमपी (वाणिज्यिक कर के अतिरिक्त आयुक्त) और मशहद उर रहमान फारूकी (केंद्रीय कर के संयुक्त आयुक्त) की पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता-कंपनी, आईडी फ्रेश फूड (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया जानने वाला परांठा ''खाने के लिए तैयार'' खाद्य पदार्थ नहीं है। बल्कि किसी व्यक्ति द्वारा उसका उपभोग करने से पहले उसको प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है।

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उनके उत्पाद- पूरी तरह गेंहू से तैयार पराठा और मालाबार पराठा को चैप्टर हेडिंग 1905 के तहत माना जाए और इस तरह उन पर 5 प्रतिशत जीएसटी ही लगाया जाए।

चैप्टर हेडिंग 1905

याचिकाकर्ता ने कहा था कि उनके उत्पाद 2017 जीएसटी अधिसूचना के अध्याय 19 में टैरिफ हेडिंग 1905 के तहत वर्गीकृत योग्यताओं को पूरा करते हैं।

उक्त शीर्षक में निम्नलिखित विवरण वाले उत्पाद शामिल हैं- ''ब्रेड, पेस्ट्री, केक, बिस्कुट और अन्य बेकर्स का सामान-जिनमें चाहे कोको हो या ना हो, कम्यून्यन वेफर्स, सीलिंग वेफर्स, राइस पेपर और इसी तरह के अन्य उत्पाद।''

यह भी दलील दी गई कि याचिकाकर्ता कंपनी के उक्त उत्पाद गेहूं के आटे से बने होते हैं, जो कि अध्याय 19 के तहत वर्गीकृत उत्पादों में प्रयुक्त प्रमुख घटक है।

इस तर्क को खारिज करते हुए, प्राधिकरण ने कहा कि-

''1905 के तहत कवर किए गए उत्पाद पहले से ही तैयार होते हैं या पूरी तरह से पके हुए उत्पाद हैं और खपत के लिए उन पर कोई और प्रक्रिया करने की आवश्यकता नहीं है और इसलिए वे भोजन में उपयोग करने के लिए तैयार होेते हैं। इस मामले में जिन उत्पादों का मुद्दा उठाया गया है वह खाने के लिए तैयार पदार्थ नहीं है बल्कि उनको खाने से पहले गर्म करने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार यह उत्पाद हेडिंग 1905 के तहत वर्गीकृत योग्यता नहीं रखते हैं।''

वास्तव में प्राधिकरण ने कहा है कि उक्त उत्पाद के संबंध सीमा शुल्क अधिनियम, 1985 के तहत कोई विशिष्ट प्रविष्टि नहीं है। इस प्रकार यह माना गया कि उक्त उत्पाद यानि परांठे को चैप्टर हेडिंग 2106 के तहत वर्गीकृत करके या रखकर सही किया गया है, क्योंकि ''भोजन की तैयारी कहीं भी निर्दिष्ट या शामिल नहीं की गई है।''

जीएसटी की 5 प्रतिशत दर प्रसंस्कृत या प्रोसेस्ड भोजन पर लागू नहीं होती है

प्राधिकरण ने पाया कि जून, 2017 और अक्टूबर, 2017 में जारी की गई जीएसटी अधिसूचनाओं की अनुसूची I की प्रविष्टि 99ए के अनुसार जीएसटी की 5 प्रतिशत की दर निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने वाले उत्पादों पर लागू होती है-

(ए) उन्हें हेडिंग 1905 या 2106 के तहत वर्गीकृत किया जाना चाहिए और

(बी) वह खाखरा, प्लेन चपाती या रोटी में से एक होना चाहिए।

वर्तमान मामले में प्राधिकरण ने पाया कि वर्गीकरण की पहली शर्त पूरी हो गई है क्योंकि उक्त उत्पाद का वर्गीकरण 2106 के तहत किया गया है। हालांकि, दूसरी शर्त के मामले में प्राधिकरण ने कहा कि परांठा न तो खाखरा है,न प्लेन चपाती और न ही रोटी।

प्राधिकरण ने कहा कि-''खाखरा, प्लेन चपाती या रोटी पूरी तरह से पककर तैयार उत्पाद होते हैं। किसी व्यक्ति द्वारा इनका उपभोग करने से पहले किसी तरह की प्रोसेसिंग की आवश्यकता नहीं होती है और यह खाद्य पदार्थ खाने के लिए तैयार होते हैं। जबकि परांठे जैसा उत्पाद खाखरा, प्लेन चपाती या रोटी से अलग हो होते ही है बल्कि आम बोलचाल के उत्पादों की तरह भी नहीं है। न ही यह उत्पाद की आवश्यक प्रकृति जैसे होते हैं। वहीं खुद याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया है कि मानव उपभोग से पहले इन उत्पादों को आगे की प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है।''

इस प्रकार याचिका का निपटारा कर दिया गया और लागू उत्पाद या परांठे को को 18 प्रतिशत जीएसटी श्रेणी में लाया गया है।

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