दिल्ली कोर्ट ने अडानी गैग ऑर्डर के खिलाफ पत्रकार परंजॉय ठाकुरता की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा

  • दिल्ली कोर्ट ने अडानी गैग ऑर्डर के खिलाफ पत्रकार परंजॉय ठाकुरता की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा

    दिल्ली की रोहिणी कोर्ट के डिस्ट्रिक्ट जज सुनील चौधरी ने बुधवार को अडानी एंटरप्राइजेज के खिलाफ रिपोर्टिंग पर रोक लगाने वाले एकतरफा गैग ऑर्डर के खिलाफ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता द्वारा दायर अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

    इससे पहले डिस्ट्रिक्ट जज आशीष अग्रवाल द्वारा चार पत्रकारों के खिलाफ एकतरफा गैग ऑर्डर रद्द करने के आदेश के मद्देनजर जज चौधरी ने परंजॉय की अपील पर विस्तार से सुनवाई करने के बाद भी आदेश पारित करने से खुद को अलग कर लिया था। जज चौधरी ने निर्देश दिया था कि अपीलों को जज अग्रवाल की अदालत में पुनः सौंपे जाने के लिए प्रिंसिपल जज के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

    प्रिंसिपल जिला एवं सेशन जज ने मंगलवार को अपील को ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मामला फिर से न्यायाधीश चौधरी के समक्ष सूचीबद्ध किया गया।

    इस पृष्ठभूमि में अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से सीनियर एडवोकेट जगदीप शर्मा ने तर्क दिया कि जज अग्रवाल ने गुण-दोष के आधार पर कुछ नहीं कहा। इसलिए यह आदेश बाध्यकारी नहीं है।

    उन्होंने दलील दी,

    "दूसरी अदालत आप पर अपने विचार नहीं थोप सकती।"

    संदर्भ के लिए जज अग्रवाल ने कहा कि कथित रूप से मानहानिकारक लेख लंबे समय से सार्वजनिक डोमेन में है। इसलिए सिविल जज को उनके लेख हटाने का निर्देश देने से पहले पत्रकारों का पक्ष सुनना चाहिए था।

    शर्मा ने दलील दी कि पत्रकार एकतरफा आदेश पारित करने वाले सीनियर सिविल जज के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं और वहां वैधानिक उपायों का लाभ उठा सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि इस बीच शुक्रवार तक जब मुख्य मुकदमा सिविल जज के समक्ष सूचीबद्ध होगा अपीलकर्ताओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    गुहा की ओर से पेश हुए वकील अपार गुप्ता ने दावा किया कि विवादित एकतरफा आदेश के आधार पर पहले ही दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।

    उन्होंने दलील दी,

    "अगर आज एकतरफा आदेश पर रोक लगा दी जाती है तो मैं लेखों को बहाल करवा पाऊंगा।"

    इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

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