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'पंचायती तलाक' में कोई कानूनी पवित्रता नहीं, इस तरह के रिवाज हिंदू विवाह अधिनियम के गठन के बाद अस्तित्व में नहीं रहे: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
5 Feb 2021 1:00 PM GMT
पंचायती तलाक में कोई कानूनी पवित्रता नहीं, इस तरह के रिवाज हिंदू विवाह अधिनियम के गठन के बाद अस्तित्व में नहीं रहे: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
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यह देखते हुए कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 एक पूर्ण संहिता है और विवाह की शर्तों के साथ-साथ तलाक की प्रक्रिया भी प्रदान करता है, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले महीने स्पष्ट किया कि 'पंचायती' तलाक की कानून दृष्टि में कोई मान्यता नहीं है।

न्यायमूर्ति अलका सरीन की खंडपीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 4 के मद्देनजर सभी रिवाज जैसे 'पंचायती' तलाक और इससे संबंधित प्रचलन का प्रभाव समाप्त हो गया है।

न्यायालय के समक्ष मामला

अदालत एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ताओं (दोनों बालिग) के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिवादी नंबर 2 से 4 को निर्देश देने की मांग की गई थी ताकि उन्हें पुलिस सहायता प्रदान की जा सके।

आगे यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता नंबर 2 के रिश्तेदार याचिकाकर्ताओं के रिश्ते के खिलाफ हैं और याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उनको अपने जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा महसूस हो रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने 21 जनवरी 2021 को सिख संस्कार और सेरमोनी के अनुसार गुरुद्वारा दशमेश पीता, खार में शादी कर ली थी।

यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता नंबर 1 की शादी पहले एक मनदीप कौर से हुई थी और उसने 19 जून 2017 को एक पंचायती तलाक ले लिया था, जबकि याचिकाकर्ता नंबर 2 ने पहले एक हरजिंदर सिंह से शादी की थी और उसने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत तलाक ले लिया था,इस संबंध में अदालत ने 14 जुलाई 2000 को एक डिक्री पारित की थी।

न्यायालय का अवलोकन

जब याचिकाकर्ता नंबर 1, निशान सिंह की वैवाहिक स्थिति के बारे में याचिकाकर्ताओं के लिए वकील से प्रश्न पूछा गया तो उसने बताया कि उसे पंचायती तलाक मिला है।

इस पर कोर्ट ने कहा,

''अजीब बात है, वकील एक पंचायती तलाक पर भरोसा कर रहा है जिसकी कानून की नजर में कोई मान्यता नहीं है। सक्षम न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता नंबर 1 की शादी को भंग करने का कोई निर्णय नहीं दिया गया है और उसकी पहली शादी कानून की नजर में अभी कायम है।''

कोर्ट ने आगे कहा,

'' याचिकाकर्ताओं का वकील यह दिखाने में भी सक्षम नहीं है कि यह अदालत याचिकाकर्ताओं को एक जोड़े के रूप में सुरक्षा कैसे प्रदान कर सकती है,जब याचिकाकर्ता नंबर 1 ने कानूनी रूप से अपनी पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया है। बताया गया है कि याचिकाकर्ता नंबर 1 और 2 ने कथित तौर पर शादी कर ली है,जबकि याचिकाकर्ता नंबर 1 के अपनी पहली पत्नी से कानूनी रूप से वैध तलाक नहीं लिया है।''

कोर्ट का आदेश

यह देखते हुए कि याचिकाकर्ताओं ने अपने जीवन की सुरक्षा और एक दंपति के रूप में जीवन जीने की स्वतंत्रता के लिए इस न्यायालय से संपर्क किया है, जिसे वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में नहीं माना जा सकता है,न्यायालय ने कहा,

''हालांकि, याचिकाकर्ताओं को एक व्यक्ति के रूप में, अगर अपने जीवन या स्वतंत्रता के लिए खतरा महसूस होता है तो वे अपने जीवन और स्वतंत्रता के खतरों के बारे में अपनी आशंकाओं के निवारण के लिए पुलिस से संपर्क करने के हकदार होंगे।''

इस प्रकार याचिकाकर्ताओं की तरफ से दायर याचिका अनुरक्षणीय नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता नंबर 1 द्वारा वैध तलाक लिए बिना ही याचिकाकर्ताओं ने शादी कर ली है। यह मानते हुए कोर्ट ने कहा कि,

''याचिकाकर्ता, व्यक्तियों के रूप में, हमेशा अपने जीवन और स्वतंत्रता के खतरों के बारे में अपनी आशंकाओं के निवारण के लिए संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से संपर्क करने के लिए स्वतंत्रता में होंगे।''

अंत में, न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार उनके प्रतिनिधित्व (अगर प्रतिनिधित्व सौंपा जाता है) पर विचार करने का निर्देश दिया है।

केस का शीर्षक - निशान सिंह व एक अन्य बनाम पंजाब राज्य व अन्य [CRWP No.763 of 2021 (O&M)]

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