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जोखिम संबंधी उपबंध मात्र से कार चोरी होने पर होटल अपने दायित्व से नहीं भाग सकता

LiveLaw News Network
18 Nov 2019 5:39 AM GMT
जोखिम संबंधी उपबंध मात्र से कार चोरी होने पर होटल अपने दायित्व से नहीं भाग सकता

“होटल मालिक अपने या अपने नौकर की लापरवाही के कारण अपने ग्राहक के वाहन की चोरी होने पर अपने दायित्व से नहीं भाग सकता।”

संविदा कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि होटल के नौकर को पार्किंग के लिए दिये गये वाहन की चोरी होने के मामले में होटल मालिक अपने नियंत्रण से बाहर तीसरे पक्ष की गलती बताकर या 'ऑनर्स रिस्क' लिखे होने का बहाना बनाकर अपने दायित्व से पल्ला नहीं झाड़ सकता।

'ताजमहल होटल बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस लि.' के मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने सख्त देयता (स्ट्रिक्ट लिएबलिटी) के सिद्धांत को इस्तेमाल करते हुए व्यवस्था दी थी कि एक बार जब अतिथि अपनी कार की चाबी होटल के नौकर को दे देता है और कार अतिथि के हाथ से होटल को सौंप दी जाती है तो 'बेलमेंट' (अमानत) का संबंध स्थापित हो जाता है। 'इंफ्रा हॉस्पिटियम' के सिद्धांत का इस्तेमाल करते हुए इसने व्यवस्था दी थी कि पार्किंग टैग पर दायित्व नकारने संबंधी नोटिस छाप देने से होटल अपने दायित्व से बच नहीं सकता।

इंफ्रा हॉस्पिटियम और प्रथमदृष्ट्या लापरवाही का नियम

होटल की ओर से दायर अपील में न्यायमूर्ति एम. शांतनगौदर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि अपने अतिथि के वाहन चोरी होने या नुकसान होने के लिए होटल मालिक के दायित्व को लेकर दो दृष्टिकोण सामने आये हैं, पहला- बीमाकर्ता के दायित्व का सामान्य कानून, जहां होटल मालिक को बीमाकर्ता समझा जाता है और उसे अतिथि के वाहन को हुई किसी भी क्षति के लिए जिम्मेदार माना जाता है तथा दूसरा, प्रथमदृष्ट्या लापरवाही का नियम, जहां यह माना जाता है कि अतिथि के वाहन के गुम होने या क्षति होने की स्थिति में होटल मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाता है। हालांकि उसे उसकी देयता से यह साबित करके मुक्त किया जा सकता है कि क्षति उसकी गलती या लापरवाही से नहीं हुई।

विभिन्न विदेशी फैसलों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि अमेरिका के कुछ प्रांतों में होटल में रखे गये सामानों को लेकर होटल मालिक पर बीमाकर्ता की देयता का सख्त नियम लागू होता है। कोर्ट ने कहा कि कई अन्य प्रांतों ने अपेक्षाकृत सामान्य प्रथमदृष्ट्या देयता का नियम अपनाकर होटल मालिकों और अतिथियों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। प्रथमदृष्ट्या लापरवाही के नियम की व्याख्या करते हुए पीठ ने कहा,

"जहां अमानत का संविदा होता है, तो वाहन लौटाने में असफल रहने या क्षतिग्रस्त अवस्था में लौटाने मात्र से होटल मालिक के खिलाफ प्रथमदृष्ट्या मामला बनता है। तब उसे यह साक्ष्य तत्काल प्रदर्शित् करना चाहिए कि नुकसान उसकी लापरवाही से नहीं हुआ है।"

भारत में सख्त देयता का नियम होटल मालिकों पर लागू करना उचित नहीं

बेंच ने कहा कि भारत में सामाजिक आर्थिक स्थितियों में बदलाव के मद्देनजर हम होटल मालिकों पर सख्त देयता का नियम थोपने को उचित नहीं मानते। उसने कहा,

"देश की बढ़ती आबादी और सामानांतर आर्थिक विस्तार के कारण कुछ दशक पहले की तुलना में अब होटलों और ऐसे प्रतिष्ठानों तक लोगों की पहुंच बढ़ी है। बदलते समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने तथा आतिथ्य से जुड़े वैकल्पिक साधने से बढ़ती चुनौतियों के कारण होटलों ने भी अलग-अलग तरह की सेवायें शुरू की हैं। इसलिए, कोई व्यक्ति अतिथि के तौर पर होटल के कमरों में रहने के अलावा अन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी होटल बार-बार आ सकता है। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति बिजनेस मीटिंग के लिए भी होटल जा सकता है, तो कांफ्रेंस, शादी समारोह, रात्रिभोज और अन्य चीजों के लिए भी। इन सभी परिस्थितियों में लापरवाही के प्रमाण के बिना, यदि होटल को इन व्यक्तियों के वाहनों की सुरक्षा के लिए सख्त देयता का नियम लागू किया जाये तो यह उनके साथ अन्याय होगा। आगंतुकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए होटलों से हर समय अपने परिसरों में पार्क किये गये प्रत्येक वाहन पर नजर रखने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

साथ ही, यह भ्री सत्य है कि होटल आने वाले व्यक्ति और होटल परिसर में उसके वाहन की पार्किंग या नौकर के जरिये करायी गयी पार्किंग के मामले को होटल मालिकों की कृपा पर छोड़ा भी नहीं जा सकता। होटल मालिकों और अतिथियों के हितों में संतुलन बनाना जरूरी है और हमारा मानना है कि प्रथमदृष्ट्या देयता का नियम किसी भी पक्ष पर अनावश्यक बोझ डाले बिना संतुलन बनाता है। यह तथ्य कि अतिथि अपने वाहन की बीमा के जरिये पहले से संरक्षित हैं, इसलिए हम अपेक्षाकृत सामान्य रुख अपनाने के पक्ष में हैं। इस तथ्य के परिप्रेक्ष्य में कि बेलमेंट रिलेशनशिप की मौजूदगी में ही प्रथमदृष्ट्या देयता आधारित होती है, ऐसे में जहां होटल और इसके अतिथि के बीच यह संबंध स्थापित होता है, तो होटल को सौंपे गये वाहनों पर प्रथमदृष्टया देयता का नियम लागू होना चाहिए।"

बेंच ने कहा कि सामान्य कानून के तहत सख्त देयता नियम बीते जमाने की बातें हैं और भारतीय परिप्रेक्ष्य में इसे प्रभावी नहीं होने देना चाहिए। इसलिए यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले को न्यायोचित ठहराये बिना या अतिथियों के वाहनों के मामले में अपवादों को ध्यान में रखे बिना सामान्य कानून अपनाने में गलती की।

कांट्रेक्ट ऑफ बेलमेंट

कोर्ट ने व्यवस्था दी कि ऐसी स्थिति में जहां होटल अतिथियों के वाहन पार्क कराता है, वाहनों को मालिकों के नियंत्रण के बाहर अपनी सुरक्षित कस्टडी में रखता है और पार्किंग पर्ची प्रस्तुत करने पर ही वाहन लौटाता है, तो बेलमेंट कांट्रेक्ट लागू समझा जायेगा। कोर्ट ने संविदा कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा,

"यह स्पष्ट है कि वैसे परिदृश्य में जहां वाहन पार्किंग के लिए होटल के कर्मचारी को दिया जाता है, तो यह कहा जा सकता है कि धारा 148 और 149 के उद्देश्यों के लिए वाहन की डिलीवरी कर दी गयी। इस प्रकार बेलमेंट प्रक्रिया अस्तित्व में आ गयी। इस प्रकार पार्किंग टोकन अतिथि को सौंपना संविदा का साक्ष्य है, जिसके माध्यम से होटल कर्मचारी कार को पार्क करने ले जाता है और वाहन मालिक के निर्देश पर लौटाता है।"

बेंच ने एक अन्य प्रश्न पर भी विचार किया कि क्या होटल संविदा के तौर पर अपनी या अपने नौकर की लापरवाही के लिए जिम्मेदार नहीं है? इस संबंध में पीठ ने कहा,

"यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि हालांकि अदालतों ने धारा 152 में 'किसी विशेष अनुबंध के अभाव में' वाक्यांश का अर्थ यह निकाला हो सकता है कि एक अमानतदार धारा 151 के तहत अपनी देयता कम कर सकता है, लेकिन ऐसी व्याख्या गलत है। धारा 152 में 'किसी विशेष संविदा के अभाव में' शब्दों से स्पष्ट है कि अमानतदार अनुबंध के तहत धारा 151 की तुलना में उच्च स्तर की देयता मंजूर करने के लिए स्वतंत्र है।"

पीठ ने इस प्रकार सार पेश किया :-

(एक) "होटल मालिक अपने अतिथि के वाहन के मामले में अपनी या अपने नौकर की लापरवाही के लिए अपनी देयता से पीछा नहीं छुड़ा सकता। एक बार यदि वाहन को होटल स्टॉफ को सौंप दिया गया तो मालिक के निर्देशानुसार सुरक्षित अवस्था में वाहन लौटाना अंतर्निहित अनुबंध का हिस्सा है।

(दो) यहां तक कि जहां सामान्य या विशेष छूट के उपबंध हैं, वहां होटल पर यह साबित करने का प्रथमदृष्टया दायित्व बनता है कि अनुबंध अधिनियम की धारा 151 और 152 के तहत वाहन में कोई भी क्षति उसकी लापरवाही या देखभाल की कमी के कारण नहीं हुई। सबूत के इस बोझ के निर्वहन के बाद ही छूट उपबंध लागू हो सकता है। इस तरह के नुकसान या क्षति के लिए छूट उपबंध मौजूद है, यह साबित करने का बोझ भी होटल पर ही होगा।"

प्रथमदृष्ट्या लापरवाही के नियम का इस्तेमाल करते हुए बेंच ने कहा कि होटल ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वाहन लौटाने में असफल रहना उसकी गलती या लापरवाही क्यों नहीं थी? इस प्रकार कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा कि पर्याप्त देखरेख की कमी के कारण होटल पर दायित्व तय किया जाना चाहिए।

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