उड़ीसा वक़ील हड़ताल : सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई और राज्य बार काउंसिल को वकीलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा

उड़ीसा वक़ील हड़ताल : सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई और राज्य बार काउंसिल को वकीलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और केएम जोसफ़ की पीठ ने बार काउन्सिल ऑफ़ इंडिया और उड़ीसा बार काउन्सिल को हड़ताली वकीलों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है।

उड़ीसा हाईकोर्ट की पैरवी कर रहे वक़ील शिव शंकर मिश्रा ने अदालत से कहा कि उन्हें अदालत के आदेश का पालन करने के लिए दो सप्ताह का और समय चाहिए। यह आदेश 06.12.2019 को जारी किया गया था। वक़ील ने यह भी कहा कि वक़ील मामलों की सुनवाई से कुछ समय से ख़ुद को अलग रख रहे हैं या सिर्फ़ ज़मानत या रोक लगाने के मामले संबंधी सुनवाई में भाग ले रहे हैं।

पीठ ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा :

"ऊपर जो कहा गया है उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई अवश्य ही जारी रहनी चाहिए। हम हाईकोर्ट से आग्रह करते हैं कि 6 दिसंबर 2019 को हमने अपने आदेश में जो कहा था उसे लागू किया जाए भले ही वक़ील इधर-उधर कुछ काम कर रहे हों या किसी विशेष दिन वक़ील काम पर काम नहीं करते हैं।"

पीठ ने वकीलों के कर्तव्यों के बारे में भी टिप्पणी की -

"हमारा मानना है कि इस तरह का चुनिंदा काम करना स्पष्ट रूप से वकीलों का अपने कर्तव्यों को पूरा नहीं करना है साथ ही यह इस अदालत के आदेश का उल्लंघन भी है और इसलिए हम राज्य बार काउन्सिल और बार काउन्सिल ऑफ़ इंडिया से उम्मीद करते हैं कि वे इनके ख़िलाफ़ दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई करेंगे।"

इसके अनुरूप, पीठ ने बार काउन्सिल को निर्देश दिया कि वे इस तरह के वकीलों का पता लगाएं जो इस स्थिति के लिए ज़िम्मेदार हैं और कहा कि इसके अधिकारी इसके लिए निश्चित रूप से ज़िम्मेदार हैं। पीठ ने उड़ीसा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को ऐसे वकीलों के नाम देने को कहा जो न्यायिक प्रक्रिया में रुकावट पैदा कर रहे हैं।