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सड़कों पर सामान बेचने वाले बच्चों का सर्वेक्षण का उद्देश्य उनके शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना है; किसी को दंडित करना नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
19 Feb 2021 11:06 AM GMT
सड़कों पर सामान बेचने वाले बच्चों का सर्वेक्षण का उद्देश्य उनके शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना है; किसी को दंडित करना नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने (गुरुवार) कर्नाटक राज्य विधि सेवा प्राधिकरण (KSLSA को निर्देश दिया कि, "यह किसी को दंडित करने के लिए नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि जिन बच्चों को खिलौने और अन्य सामान सड़कों पर बेचने के लिए मजबूर किया जाता है, उन्हें शिक्षा प्राप्त करने के काम में लगाया जाना चाहिए।" इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि, बेंगलुरु की सड़कों पर खिलौने, फूल आदि बेचने के लिए मजबूर किए जाने वाले कमजोर बच्चों की पहचान के लिए डेटा संग्रह सर्वेक्षण शुरू की जाए।

मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और गैर सरकारी संगठनों ने भाग लिया, कहा कि "हम जो कर रहे हैं वह बच्चों के कल्याण के लिए है। किसी को यह आभास नहीं होना चाहिए कि डेटा संग्रह का कोई अन्य परिणाम होगा। "

अपने आदेश में पीठ ने कहा कि,

"भाग लेने जा रहे सभी हितधारकों को पूरी तरह से पता है कि डेटा संग्रह टीम का अंतिम और प्रमुख उद्देश्य कमजोर बच्चों और विशेष रूप से उनके शिक्षा के अधिकार के मामले में सभी संभव सहायता प्रदान करना है। इसलिए, पुलिस सहित सभी हितधारकों की जिम्मेदारी है कि यह सुनिश्चित किया जा ए कि डेटा संग्रह की गतिविधि को किसी भी कार्रवाई से नहीं जोड़ा जाएगा, जो राज्य सरकार द्वारा कर्नाटक राज्य भीख मांगना निषेध अधिनियम, 1975 के तहत शुरू की गई है। "

आगे कहा गया कि,

"हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि बच्चों के अधिकारों को किस तरीके से संरक्षित किया जाएगा, यह डेटा के समुचित संग्रह और विश्लेषण के बाद ही तय किया जाएगा। डेटा संग्रह के दौरान सामने आए तथ्यों का विश्लेषण करना होगा और इसलिए आंकड़ों के संग्रह के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर कोई कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले किसी भी ऑथिरिटी को जल्दीबाजी करने की जरूरत नहीं है।"

हालांकि, "अगर बाल तस्करी के गंभीर मामले हैं, तो सभी संबंधित व्यक्ति उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।"

अदालत ने लेत्ज़िटक फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिसमें बच्चों को शहर में सड़कों पर सामान बेचने के लिए मजबूर करने के मुद्दे पर प्रकाश डाला गया।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि "यह कदापि, किसी को दंडित करने या कार्रवाई शुरू करने का प्रयास नहीं है, जो बच्चों को कोई नुकसान या पूर्वाग्रह पैदा करेगा, जो पहले से ही बच्चों के कमजोर समूहों से संबंधित हैं। हालांकि, डेटा संग्रह के बाद एक वैज्ञानिक तरीके से, आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। "

न्यायालय ने यह भी माना कि यह संभव है कि कमजोर स्थानों पर नाबालिग बच्चों के साथ आने वाले माता-पिता या व्यक्ति डेटा संग्रह के बारे में कई आशंकाएं रखते हों, इसलिए डेटा संग्रह के समय बच्चों के साथ आने वाले व्यक्ति के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता होगी। आगे कहा कि, "यही कारण है कि डेटा संग्रह के समय कोई भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करेगा। डेटा एकत्र करने के बाद बहुत व्यापक तरीके से कार्रवाई की जाएगी।"

कोर्ट ने कहा कि,

"जो कार्रवाई शुरू की जाएगी, वह केवल एक पहला कदम है और इसे जारी रखना है। इसलिए, डेटा एकत्र करते समय पाए गए किसी भी त्रुटि को बाद के कार्रवाई में ठीक किया जा सकता है। यह सभी हितधारकों का कर्तव्य है, जो कार्य डेटा संग्रह में भाग लेते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चों या उनके साथ आने वाले माता-पिता या वयस्कों को पूरी तरह से अवगत कराया जाए कि बच्चों के लाभ के लिए डेटा संग्रह किया जा कहा है। "

अदालत को सूचित किया गया कि स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट के सदस्य, सभी 8 डीसीटी टीमों के साथ जुड़े रहेंगे और वे पृष्ठभूमि में रहेंगे और सिविल ड्रेस में रहेंगे। इसके अलावा, ट्रैफिक पुलिस उनके साथ उपलब्ध वीडियो क्लिप साझा करेगी और दूर से ही गतिविधि को देखेगी।

बीबीएमपी ने अदालत को आश्वासन दिया है कि बीबीएमपी के संयुक्त आयुक्त लगातार डीसीटी सदस्यों के साथ समन्वय करेंगे। बीबीएमपी सभी 8 डीसीटी टीमों को निजी वाहन प्रदान करेगा और डेटा सर्वेक्षण करने के समय भोजन और आवास प्रदान करेगा।

इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों द्वारा कानून के अनुसार बच्चों को बचाने की स्थिति में, बीबीएमपी ने Covid-19 टेस्ट के लिए सभी आठ क्षेत्रों में अस्थायी स्वास्थ्य देखभाल इकाइयां स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। केएसएलएसए द्वारा प्रदान की गई पुस्तिका में उल्लिखित प्रारूप के अनुसार, संयुक्त आयुक्त पूरे दिन के डेटा संग्रह को एकत्र करके, उचित तरीके से संभाल के रखेंगे।

एनजीओ, जो चाइल्डलाइन फाउंडेशन चला रहा है, वह डीसीटी सदस्यों को असुरक्षित स्थानों पर रहने वाले कमजोर बच्चों का डेटा प्रदान करेगा।

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