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सिर्फ़ बहुत ज़रूरी मामलों की सुनवाई तक ही अदालत के काम को सीमित रखना तर्क से परे : जीएचसीएए के अध्यक्ष ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा

LiveLaw News Network
5 May 2020 3:00 AM GMT
सिर्फ़ बहुत ज़रूरी मामलों की सुनवाई तक ही अदालत के काम को सीमित रखना तर्क से परे : जीएचसीएए के अध्यक्ष ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा
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गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (जीएचसीएए ) के अध्यक्ष यतिन ओझा ने मुख्य न्यायधीश विक्रम नाथ को पत्र लिखकर हाईकोर्ट को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरी सुनवाई का आग्रह किया है।

पत्र मेंं लिखा है,

"…आपसे मेरा अनुरोध है कि अदालत को पूरी तरह वीडियो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई करनी चाहिए और नए और पुराने सभी मामलों की सुनवाई होनी चाहिए।" ओझा ने मुख्य न्यायाधीश से कहा है कि वह इस बारे में शुक्रवार को जारी हाईकोर्ट के सर्कुलर को वापस ले लें।"

इस सर्कुलर के माध्यम से हाईकोर्ट ने बताया है कि जिन मामलों की तत्काल सुनवाई होनी है उस मामले में संबंधित वक़ील को सबसे पहले "अर्जेंट नोट" फ़ाइल करने चाहिए। जज इसकी जांच करेंगे और अगर मामला अर्जेंट पाया गया तो संबंधित वक़ील को इसकी सूचना दे दी जाएगी।

ओझा ने इस सर्कुलर का विरोध करते हुए कहा, "इस सर्कुलर की वजह से बहुत सारे वकीलों की मुश्किलें बढ़ेंगी जो आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि जब इस तरह की सघन प्रक्रिया पहले से ही है तब अदालत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूर्ण सुनवाई शुरू करने पर ग़ौर करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अदलत के सीमित कामकाज से मुक़दमादारों ख़ासकर ऐसे मुक़दमादारों को ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है जिनका मामला ज़मानत से संबंधित है क्योंकि ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई नहीं होने की वजह से वे जेल में काफ़ी समय से पड़े हुए हैं…।"

उन्होंने आगे अदालत को सूचित किया कि वकीलों ने उन्हें ऐसे 50 मामले गिनाए जब हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से फ़ाइलिंग प्रक्रिया में चूक हुई जिसकी वजह से मुक़दमादारों और वकीलों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

इसलिए उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि चूंकि सुनवाई की प्रक्रिया निर्धारित की जा चुकी है, इसलिए अदालत को अपना आया सर्कुलर वापस ले लेना चाहिए वीडियो कंफ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित रूप से काम शुरू कर देना चाहिए।

पत्र की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करेंं



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