धमकी और उत्पीड़न के डर से NLSIU में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रद्द
Amir Ahmad
21 Sept 2026 12:10 PM IST

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) बेंगलुरु की लॉ एंड सोसाइटी कमेटी ने कार्यकर्ता उमर खालिद की जेल में बंद रहने की कहानी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रिजनर नंबर 626710 इज़ प्रेजेंट की प्रस्तावित स्क्रीनिंग रद्द की। कमेटी के अनुसार कार्यक्रम के आयोजकों को आपराधिक कार्रवाई, धमकी, निजी जानकारी सार्वजनिक करने और अन्य प्रकार के उत्पीड़न की गंभीर धमकियों का सामना करना पड़ा था।
यह स्क्रीनिंग राजनीतिक बंदियों के दिवस के अवसर पर आयोजित की जानी थी। कुछ संगठनों के विरोध के बाद कार्यक्रम को पहले स्थगित कर 19 सितंबर 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, बाद में आयोजकों ने स्क्रीनिंग नहीं करने का फैसला किया।
लॉ एंड सोसाइटी कमेटी ने छात्रों को भेजे अपने संदेश में कहा कि वह स्वतंत्रता और न्याय से जुड़े सवालों पर अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखती है। साथ ही कमेटी ने अपने साथियों और NLS समुदाय की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया। कमेटी के अनुसार, छात्र संघ और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ कई दौर की चर्चा के बाद डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रद्द करने का निर्णय लिया गया।
कमेटी ने कहा कि वह मौजूदा समय में आपराधिक न्याय से जुड़े सवालों पर सूचनात्मक और आलोचनात्मक चर्चा जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्क्रीनिंग रद्द होने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), बेंगलुरु ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस निर्णय पर प्रतिक्रिया दी। संगठन ने पहले भी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध किया और विश्वविद्यालय प्रशासन से शैक्षणिक परिसरों के राजनीतिक या वैचारिक प्रचार के लिए कथित दुरुपयोग को रोकने की मांग की।
ABVP के सचिव अभिनंदन मिर्जी ने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता का इस्तेमाल राष्ट्रीय संप्रभुता को निशाना बनाने वाले एजेंडे को बचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने स्वतंत्र अभिव्यक्ति और जीवंत परिसर की आवश्यकता स्वीकार करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित कानूनी संस्थानों को ऐसे लोगों से जुड़े विचारों के प्रचार का मंच नहीं बनना चाहिए जिन पर राष्ट्र पर हमलों का महिमामंडन करने या जम्मू-कश्मीर के अलगाव और विखंडन की वकालत करने से जुड़े आरोप लगाए जाते हैं।
स्क्रीनिंग रद्द किए जाने के बावजूद कार्यक्रम के अन्य हिस्से आयोजित किए गए। इनमें प्रोफेसर राधिका चितकारा के साथ UAPA जमानत और उससे आगे विषय पर चर्चा तथा कला समूह कलावकृति के साथ खुले मंच पर कला संध्या शामिल थी।
यह घटनाक्रम यूनिवर्सिटी परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अकादमिक विमर्श और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े सवालों के बीच सामने आया।

