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निर्भया केस : दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी करने की मांग पटियाला हाउस ने ठुकराई

LiveLaw News Network
7 Feb 2020 1:24 PM GMT
निर्भया केस : दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी करने की मांग पटियाला हाउस ने  ठुकराई
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निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले में पटियाला हाउस अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी करने का अनुरोध किया गया था।

एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने शुक्रवार को सभी पक्षों को सुनने के बाद ये फैसला सुनाया और कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषियों को उपाय लेने के लिए सात दिन का समय दिया है। लिहाजा फिलहाल डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि 11 फरवरी के बाद ही ऐसी अर्जी पर सुनवाई हो सकती है।

सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल की ओर से कहा गया कि फिलहाल कोई याचिका लंबित नहीं है इसलिए नया डेथ वारंट जारी किया जा सकता है।

लेकिन दोषी मुकेश की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने इसका विरोध किया और बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषियों को सात दिन का समय दिया है और अभी ये याचिका प्री-मेच्योर है। वैसे भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की दो अर्जियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

इससे पहले अदालत ने गुरुवार को इस याचिका पर चारों दोषियों को नोटिस जारी किया था और तिहाड़ प्रशासन से भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था ।

अपनी अर्जी में जेल प्रशासन और अभियोजन ने कहा है कि तीसरे दोषी अक्षय कुमार सिंह की राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भी खारिज हो गई है। बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ये याचिका खारिज कर दी। बाकी दो अन्य भी अपने उपाय पूरे कर चुके हैं जबकि चौथे दोषी पवन ने ना तो सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है और ना ही दया याचिका। ऐसे में अब नया डेथ वारंट जारी किया जाना चाहिए।

अक्षय की तीसरी दया याचिका है जिसे राष्ट्रपति ने खारिज किया है। दोषी मुकेश और विनय की दया याचिका खारिज हो चुकी हैं जबकि चौथे दोषी पवन ने अभी तक दया याचिका के विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया है।

वैसे इस मामले में सजायाफ्ता मुकेश सिंह के सभी विकल्प जिसमें क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका शामिल हैं, खत्म हो चुके हैं। दया याचिका खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका भी सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है।

दोषी अक्षय ठाकुर की सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका खारिज हो चुकी है और अब दया याचिका का संवैधानिक विकल्प भी खत्म हो चुका है।

जबकि दोषी विनय शर्मा की क्यूरेटिव याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है और राष्ट्रपति ने भी दया याचिका खारिज कर दी है। हालांकि दोषी पवन गुप्ता के पास अभी दोनों विकल्प क्यूरेटिव और दया याचिका उपलब्ध हैं।

दरअसल 31 जनवरी को को सभी दोषियों द्वारा सभी उपचार पूरे ना करने के चलते फांसी को अगले आदेश तक टाल दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की दोषियों को अलग- अलग फांसी देने की याचिका खारिज करते हुए दोषियों को एक सप्ताह के भीतर सारे कानूनी उपचार करने को कहा है।

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