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'मानवीय अस्तित्व के लिए करूणा और सेवा को फिर से जागृत करने की आवश्यकता है': एमपी और उड़ीसा हाईकोर्ट ने जमानत की शर्त के रूप में पौधे लगाने को कहा

LiveLaw News Network
27 Jun 2020 3:45 AM GMT
मानवीय अस्तित्व के लिए करूणा और सेवा को फिर से जागृत करने की आवश्यकता है: एमपी और उड़ीसा हाईकोर्ट ने जमानत की शर्त के रूप में पौधे लगाने को कहा
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अपने हालिया एक आदेश में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक नाबालिग लड़की की शालीनता का अपमान करने के इरादे से उस पर हमला करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत देते हुए निर्देश दिया है कि ट्री गार्ड के साथ पौधे लगाए। न्यायालय ने आरोपी को जमानत देते समय लगाई गई शर्तो में यह भी एक शर्त लगाई है।

जस्टिस आनंद पाठक ने शर्त लगाते हुए कहा कि-

"कोर्ट ने यह निर्देश एक टेस्ट करने के रूप में दिया है ताकि सृजन की प्रक्रिया और प्रकृति के साथ संबंध जोड़ने की दिशा में एक कदम बढ़ाकर हिंसा और बुराई के एनाटाॅमी के खत्म किया जा सकें। मानव अस्तित्व के लिए करुणा, सेवा, प्रेम और दया की प्राकृतिक प्रवृत्ति को फिर से जागृत करने की आवश्यकता है क्योंकि ये सभी मानव अस्तित्व के साथ स्वभाविक रूप से जुड़ी विशेषताएं हैं।''

आरोपी पर आईपीसी की धारा 354 और पाॅस्को एक्ट की धारा 7/8 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने COVID19 स्थिति के मद्देनजर आरोपी को जमानत दे दी है। उसे पचास हजार रुपये के निजी मुचलके के आधार पर यह जमानत दी गई है। साथ ही यह शर्त लगाई गई है कि उसे पौधे लगाने होंगे।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि-

''इन पेड़ों की प्रगति की निगरानी करना ट्रायल कोर्ट का कर्तव्य है क्योंकि पर्यावरण के पतन के कारण मानव अस्तित्व दांव पर लगा हुआ है। इसलिए अपीलकर्ता द्वारा आदेश का अनुपालन करने में बरती गई लापरवाही के प्रति अदालत आंख बंद करके नहीं बैठ सकती है। इसलिए, ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया जाता है कि वह पेड़ों की प्रगति और अपीलकर्ता द्वारा इन निर्देशों का अनुपालन करने के संबंध में प्रत्येक त्रैमासिक (प्रत्येक तीन महीने) को एक संक्षिप्त रिपोर्ट दायर करे। जो इस कोर्ट के समक्ष शीर्षक ''निर्देश'' के तहत दायर की जाए। अगर अपीलकर्ता ने इस शर्त का उल्लंघन किया तो फिर उसे जमानत के लाभ नहीं मिलेगा।''

उड़ीसा हाईकोर्ट ने भी हाल ही में दिए एक आदेश में आरोपी व्यक्ति को जमानत देते समय सौ पौधे लगाने का निर्देश दिया था। यह व्यक्ति आपराधिक धमकी और हत्या का प्रयास करने के मामले में आरोपी है।

जस्टिस एसके पाणिग्रही की एकल पीठ ने कहा था कि-

''यह निर्देश दिया जा रहा है कि याचिकाकर्ता को उन कठोर नियमों और शर्तों के आधार पर जमानत पर रिहा किया जाए ,जो भी एसडीजेएम, बौध को उचित लगती हैं। साथ ही यह शर्त भी लगाई जाए कि आरोपी जमानत पर रिहा होने के तीन महीने के अंदर अपने गांव में सौ पौधे लगाएंगा।''

आरोपी को संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष उक्त शर्त के अनुपालन का प्रमाण भी पेश करने का निर्देश दिया गया है।

पर्यावरण की सुरक्षा के संदर्भ में जमानत की यह अजीबोगरीब शर्त स्वागत योग्य है।

उड़ीसा हाईकोर्ट के समक्ष आया मामला एक सुभ्रांसु प्रधान से संबंधित था। जिस पर शिकायतकर्ता के घर में जबरन घुसने और उसके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया था। यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी शिकायतकर्ता की बेटी को पसंद करता था और उसने घातक हथियारों के बल पर उसका अपहरण करने का प्रयास किया था।

इसलिए आरोपी के खिलाफ बौध पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 452 (चोट, हमले या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में जबरन घुसने ), 354 बी (अपमानित करने के इरादे से महिला के साथ आपराधिक बल का उपयोग या हमला) , 294 (सार्वजनिक रूप से अश्लील हरकतें ), 307 (हत्या का प्रयास), 506 (आपराधिक धमकी) और 379 (चोरी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता की बेटी और आरोपी के बीच शादी का प्रस्ताव चल रहा है। इसको देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि,''तथ्यों से यह सामने आया है कि वर्तमान याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है। इसके अलावा, कथित तौर पर किए गए अपराधों के मूल तत्व भी साबित नहीं हो रहे हैं। इसके बजाय यह देखने में आया है कि वे एक-दूसरे से अच्छी तरह से परिचित थे और उनके बीच अंतरंगता थी।

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहांं क्लिक करेंं



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