पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच केंद्र ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति नियंत्रित की, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आदेश जारी

Amir Ahmad

10 March 2026 1:33 PM IST

  • पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच केंद्र ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति नियंत्रित की, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आदेश जारी

    पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति प्रभावित होने के बाद केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नया आदेश जारी किया।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 9 मार्च को प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 अधिसूचित किया है। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की खेपों पर संघर्ष का असर पड़ा है और कई आपूर्तिकर्ताओं ने आपूर्ति में बाधा की स्थिति का हवाला दिया।

    सरकार के अनुसार इस आदेश का उद्देश्य घरेलू उपभोग, परिवहन और उर्वरक उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए गैस की उपलब्धता और समान वितरण सुनिश्चित करना है।

    चार स्तर की प्राथमिकता व्यवस्था

    नए आदेश के तहत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति चार स्तरों की प्राथमिकता प्रणाली के आधार पर की जाएगी, जो पिछले छह महीनों की औसत खपत पर आधारित होगी।

    पहले प्राथमिकता वर्ग को उपलब्धता के अनुसार पिछले छह महीनों की औसत खपत का 100 प्रतिशत गैस मिलेगा। इसमें घरेलू पाइप्ड गैस, परिवहन में उपयोग होने वाली सीएनजी, एलपीजी उत्पादन तथा पाइपलाइन संचालन से जुड़े आवश्यक ईंधन शामिल हैं।

    दूसरे प्राथमिकता वर्ग में उर्वरक संयंत्रों को रखा गया। इन्हें पिछले छह महीनों की औसत खपत का 70 प्रतिशत गैस दिया जाएगा और इसका उपयोग केवल उर्वरक उत्पादन के लिए करना होगा। इसके लिए इकाइयों को प्रमाणपत्र भी देना होगा।

    तीसरे प्राथमिकता वर्ग में चाय उद्योग, विनिर्माण क्षेत्र और राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े अन्य औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं। इन्हें पिछले छह महीनों की औसत खपत का 80 प्रतिशत गैस मिलेगा।

    चौथे वर्ग में शहर गैस वितरण नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता शामिल हैं, जिन्हें भी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी।

    कुछ उद्योगों की आपूर्ति घटेगी

    प्राथमिकता क्षेत्रों की जरूरत पूरी करने के लिए सरकार ने कुछ क्षेत्रों में गैस आपूर्ति घटाने या पूरी तरह रोकने का आदेश दिया।

    इसमें पेट्रोकेमिकल संयंत्र, उच्च तापमान-दबाव गैस उपभोक्ता और जरूरत पड़ने पर बिजली संयंत्र भी शामिल हो सकते हैं। तेल रिफाइनरी कंपनियों को भी अपनी गैस खपत पिछले छह महीनों के औसत के लगभग 65 प्रतिशत तक सीमित करने को कहा गया।

    गैस के पुनर्वितरण की जिम्मेदारी

    आदेश के अनुसार गैस के मोड़ और पुनर्वितरण का प्रबंधन गैस प्राधिकरण और पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ मिलकर करेंगे। गैर-प्राथमिकता क्षेत्रों से ली गई गैस को प्राथमिकता क्षेत्रों को “पूल मूल्य” पर दिया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह दी गई गैस को दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा और गैस प्राप्त करने वाली इकाइयों को इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती न देने का आश्वासन देना होगा।

    अनुबंधों पर भी लागू होगा आदेश

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश मौजूदा गैस बिक्री समझौतों और अन्य वाणिज्यिक अनुबंधों पर भी प्रभावी होगा। गैस उत्पादकों, विपणन कंपनियों, पाइपलाइन संचालकों और वितरण कंपनियों को केंद्र द्वारा तय नई आपूर्ति व्यवस्था का पालन करना होगा।

    साथ ही गैस उत्पादन, आयात, भंडारण और खपत से जुड़ी सभी जानकारी अधिकृत एजेंसी यानी पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ को उपलब्ध करानी होगी।

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