Breaking | नोएडा में पानी भरे गड्ढे में टेक इंजीनियर की मौत पर NGT ने स्वतः संज्ञान लिया, कहा- प्रशासनिक लापरवाही से गई जान
Amir Ahmad
22 Jan 2026 4:38 PM IST

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पानी से भरे गड्ढे में डूबकर मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और सुधारात्मक कदम न उठाने के कारण यह दर्दनाक घटना हुई।
NGT ने प्रारंभिक तौर पर इसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उल्लंघन का मामला माना है।
NGT की पीठ जिसकी अध्यक्षता जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे थे और जिसमें विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल शामिल थे ने 20 जनवरी 2026 को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में मूल आवेदन दर्ज किया। रिपोर्ट का शीर्षक था “नोएडा सीईओ हटाए गए, मुख्यमंत्री ने टेक इंजीनियर की डूबने से मौत की SIT जांच के आदेश दिए।”
समाचार के अनुसार, सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की नोएडा सेक्टर-150 में एक व्यावसायिक स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई। बताया गया कि घने कोहरे के कारण एक तीखे मोड़ पर वह संतुलन खो बैठे और सीधे गड्ढे में गिर गए।
NGT ने रिकॉर्ड किया कि जिस जमीन पर यह हादसा हुआ उसे पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित किया गया लेकिन बीते लगभग दस वर्षों में वह क्षेत्र बारिश के पानी और आसपास की आवासीय सोसाइटियों के अपशिष्ट जल के जमा होने से तालाब में तब्दील हो गया।
प्रशासनिक चूक की ओर इशारा
अधिकरण ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2015 में तैयार किया गया स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट प्लान आज तक लागू नहीं किया गया।
दस्तावेजों से पता चला कि सिंचाई विभाग ने अतिरिक्त पानी को हिंडन नदी में मोड़ने के लिए एक हेड रेगुलेटर प्रस्तावित किया था। इसके सर्वे तथा डिजाइन के लिए नोएडा प्राधिकरण ने वर्ष 2016 में 13.05 लाख रुपये भी जारी किए।
इसके बावजूद सुधारात्मक कार्यों में देरी होती रही जिससे इलाके में गंभीर जलभराव की स्थिति बनी। आसपास की कई आवासीय सोसाइटियों के बेसमेंट में पानी भर गया, क्योंकि नदी में पानी की निकासी के लिए कोई नियंत्रित व्यवस्था मौजूद नहीं थी।
NGT ने कहा कि नियंत्रित आउटलेट के अभाव में पानी जमा होता रहा, जिससे हादसे का खतरा बढ़ता गया।
अधिकरण ने टिप्पणी की,
“समाचार रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि नोएडा प्राधिकरण द्वारा समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति की जान चली गई।”
पर्यावरण कानून के उल्लंघन का मामला
NGT ने माना कि यह मामला प्रथम दृष्टया पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। इसमें पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन तथा अनुसूचित कानूनों के क्रियान्वयन से जुड़े गंभीर प्रश्न उठते हैं।
पीठ ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले नगर निगम ग्रेटर मुंबई बनाम अंकिता सिन्हा का भी उल्लेख किया, जिसमें NGT को स्वतः संज्ञान लेकर मामलों की सुनवाई करने का अधिकार मान्यता दी गई।
NGT ने संकेत दिया कि मामले की आगे विस्तृत जांच की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल होगी।

