राष्ट्रीय महिला आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट की 'त्वचा-से-त्वचा' संपर्क POCSO मामले के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती देने का निर्णय लिया

  • राष्ट्रीय महिला आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट की त्वचा-से-त्वचा संपर्क POCSO मामले के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती देने का निर्णय लिया

    राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट के जजमेंट (सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष) को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें कहा गया था कि त्वचा- से- त्वचा संपर्क किए बिना बच्चे के स्तनों को टटोलना यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत 'यौन हमला' नहीं माना जाएगा।

    बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर खंडपीठ) द्वारा निर्णय मे कहा गया था कि इस तरह के अपराध को वास्तव में भारतीय दंड संहिता [ IPC की धारा 354 ( महिला की विनम्रता को अपमानित करना)] के तहत 'छेड़छाड़' माना जाएगा।

    न्यायमूर्ति पुष्पा गनेदीवाला की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह सत्र न्यायालय के उस आदेश को संशोधित करते हुए यह अवलोकन करते हुए अपने फैसले में एक 39 वर्षीय व्यक्ति को 12 वर्षीय लड़की को छेड़छाड़ करने और उसकी सलवार उतारने के लिए यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया था।

    [नोट: उच्च न्यायालय ने उस व्यक्ति को IPC की धारा 343 और धारा 354 के तहत दोषी ठहराया, जबकि उसे POCSO अधिनियम की धारा 8 के तहत बरी कर दिया।]

    NCW की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने आज एक ट्वीट पोस्ट कर जानकारी दी कि NCW, सतीश रगडे बनाम महाराष्ट्र राज्य (दिनांक 19-01-2021) NCW बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती देने जा रही है।

    एक अन्य ट्वीट में रेखा शर्मा ने कहा कि,

    "इस फैसले का न केवल महिलाओं की सुरक्षा और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि सभी महिलाओं को उपहास के दायरे में रखा जाएगा और महिलाओं की सुरक्षा और सुरक्षा के लिए विधायिका द्वारा प्रदान किए गए कानूनी प्रावधानों को तुच्छ बनाया है।"

    संबंधित समाचार में, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सोमवार (25 जनवरी) को महाराष्ट्र सरकार से इस निर्णय के खिलाफ "तत्काल अपील" दायर करने को कहा। एनसीपीसीआर के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो द्वारा पत्र लिखा गया और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को संबोधित किया गया कि यदि अभियोजन ने POCSO अधिनियम की भावना के अनुसार प्रस्तुतियां की थीं, तो आरोपी नाबालिग के खिलाफ गंभीर अपराध करने के कारण आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता है।

    पत्र में आगे लिखा गया है कि,

    "बिना पेनिट्रेशन के इरादे से 'त्वचा से त्वचा' के संपर्क के द्वारा यौन करने की भी समीक्षा करने की आवश्यकता है और राज्य को इस पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह माइनर विक्टिम के लिए अपमानजनक प्रतीत होता है।"

    एनसीपीसीआर प्रमुख ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया है कि ऐसा लगता है कि पीड़ित की पहचान का खुलासा कर दिया गया है। इसलिए आयोग का विचार है कि राज्य को इस पर ध्यान देना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

    राज्य सरकार से जजमेंट के खिलाफ एक तत्काल अपील दायर करने का अनुरोध करते हुए पत्र में लिखा हुआ था कि,

    "आयोग POCSO अधिनियम 2012 की धारा 44 के तहत निगरानी निकाय है और आपसे मामले में आवश्यक कदम उठाने और निर्णय के खिलाफ तत्काल अपील करने का अनुरोध करता है ..."

    महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से नाबालिग का विवरण (एनसीपीसीआर) प्रदान करने (सख्त गोपनीयता बनाए रखने) का भी अनुरोध किया गया है ताकि आयोग बच्चे के सर्वोत्तम हित के लिए कानूनी सहायता आदि जैसी सहायता प्रदान कर सके।

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