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विधायक खाना बांटने के एजेंट नहीं हैं, मणिपुर हाईकोर्ट ने पीडीएस को प्रभावी बनाने के लिए निर्देश जारी किए

LiveLaw News Network
20 May 2020 3:00 AM GMT
विधायक खाना बांटने के एजेंट नहीं हैं,  मणिपुर हाईकोर्ट ने पीडीएस को प्रभावी बनाने के लिए निर्देश  जारी किए
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एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मणिपुर हाईकोर्ट ने आवश्यक वस्तुओं का व्यापक वितरण सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं।

न्यायमूर्ति लनुसुंग्कुम ज़मीर और न्यायमूर्ति नोबिन सिंह की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत जो योग्य हैं ,जिसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके पास कार्ड नहीं है, उन्हें लॉकडाउन के दौरान पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के माध्यम से खाद्यान्नों की आपूर्ति राज्य सरकार आवश्यक रूप से करे।

अदालत ने इस मामले में विधायकों के हस्तक्षेप की भी आलोचना की जो लोगों में वितरण के लिए पीडीएस से खाद्यान्नों की ख़रीद करते हैं और कहा कि अधिनियम में इसकी इजाज़त नहीं है।

बेंच ने कहा,

"यह सर्वविदित है कि विधायक लोगों के प्रतिनिधि होते हैं, उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है और यह भी कि वे लोगों को महत्वपूर्ण सेवाएं देते हैं, लेकिन पर खाद्य अधिनियम 2013 में यह कहीं नहीं है कि विधायकों को पीडीएस वितरण में शामिल किए जाने की ज़रूरत है।"

अदालत ने कहा,

"अगर राज्य सरकार या किसी अधिकारी जिसको यह अधिकार दिया गया है, के अलावा कोई व्यक्ति लक्षित पीडीएस वितरण व्यवस्था में शामिल होता है और चावल का वितरण करता है या इसके वितरण में शरीक होता है तो उसकी यह गतिविधि ग़ैरक़ानूनी है और उसे क़ानून के तहत उपयुक्त सज़ा मिल सकती है।"

अदालत के निर्देश

1) उचित मूल्य के दुकानदारों का चुनाव :

अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस किसी को दिए जाने से पीड़ित है तो वह इसके लिए उचित जगह पर इसकी शिकायात कर सकता है और सरकार को दुकानदारों के चुनाव की प्रक्रिया की समीक्षा अवश्य ही करनी चाहिए ताकि पीडीएस से कम मात्रा के वितरण की शिकायत को दूर की जा सके।

2) पीडीएस एजेंट के रूप में विधायक

विधायकों द्वारा पीडीएस से अनाज की ख़रीद करने और उनका वितरण करने पर घोर आपत्ति करते हुए अदालत ने कहा, "खाद्य अधिनियम 2013 में ऐसा प्रावधान नहीं है कि वे पीडीसी के माध्यम से विभिन्न वस्तुओं के वितरण में शामिल हों।"

3) पीडीएस में चावल के वितरण की निगरानी

अदालत ने कहा, "राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसने जो व्यवस्था बनायी है वह प्रभावी हो और लोगों को शिकायत का मौक़ा नहीं मिले।"

4) योग्य परिवारों की जिलावार सूची

अदालत ने कहा कि हर योग्य परिवारों की जिलावार सूची संबंधित सरकारी अधिकारी अपने आधिकारिक वेबसाइट पर इस फ़ैसले के सुनाए जाने के एक सप्ताह के भीतर अपलोड करे।

5) सरकारी अधिकारी सूचना को प्रसारित करें

पीडीएस (नियंत्रण) आदेश 2015 के तहत अधिकृत एजेंसियों या ठेकेदारों जिसके माध्यम से अनाज उठाए जाएंगे, उनका नाम, पता एवं अन्य विवरण सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।

6) सरकार द्वारा खाद्य अधिनियम 2013 की धारा 35 के तहत अधिकार-प्राप्त अधिकृत अधिकारी ही अनाज उठाएं और उसका वितरण करें और ऐसा नहीं करने पर वे इसके लिए ज़िम्मेदार होंगे।

7) उचित मूल्य की दुकान के मालिक को सभी तरह के उचित रिकॉर्ड रखने और रसीद के फ़ॉर्म रखने ज़रूरी होंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ जांच होगी और तत्काल कार्रवाई की जाएगी जिसमें दोषी पाए जाने पर लाइसेन्स रद्द करने की बात भी शामिल है।

8) ऐसे लोग जो आपूर्ति नहीं मिलने या कम मिलने की शिकायत करते हैं उनकी शिकायत दूर करने की व्यवस्था हो। अदालत ने निर्देश दिया कि पीड़ित व्यक्ति किसी भी लीगल एड क्लीनिक या फ़्रंट ऑफ़िस/सचिव, ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण, सदस्य सचिव, मणिपुर विधिक सेवा से मदद प्राप्त कर सकते हैं और शिकायत कर सकते हैं।

9) कोरोना महामारी के समाप्त होने को लेकर अनिश्चितता को देखते हुए राज्य सरकार ऐसे लोगों की पहचानकर सकती है जो घर में अनाज जमा रखते हैं और उन्हें वह राहत सामग्री नहीं लेने का आग्रह कर सकती है और इनका वितरण जरूरतमंदों में किया जा सकता है।


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