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मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, प्रवासी श्रमिक रेलवे स्टेशनों तक पहुंचने के लिए परेशान, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं कर रहे; राज्य सरकार को SOP पर स्टेटस र‌िपोर्ट दाखिल करने को कहा

LiveLaw News Network
21 May 2020 10:41 AM GMT
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, प्रवासी श्रमिक रेलवे स्टेशनों तक पहुंचने के लिए परेशान, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं कर रहे; राज्य सरकार को SOP पर स्टेटस र‌िपोर्ट दाखिल करने को कहा
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मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा, "प्रवासी मजदूर सड़कों पर परेशान हैं। वे न सामाजिक / शारीरिक दूरी बरत रहे हैं और न उनके पास पर्याप्त सुरक्षात्मक उपाय हैं, इसलिए, राज्य सरकार उन्हें तत्काल आश्रय घरों / चिन्हित स्थानों में रखने की व्यवस्‍था करे।"

हाईकोर्ट ने कहा है कि उपरोक्त तथ्यों का जूडिशल नोटिस लिया जा सकता है, इसलिए आज ही अपेक्षित जानकारियों को "सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाए"।

जस्टिस एम सत्यनारायणन और डॉ अनीता सुमंत की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि "गैर-सरकारी संगठन ...समान विचारधारा के गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर, प्रवासी श्रमिकों के साथ समन्वय करेंगे ताकि उन्हें सुव्यवस्थित किया जाए और ट्रेनों में सवार होने में उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जाए।"

पीठ ने कहा, "कोर्ट का विचार का है कि उत्तरदाताओं को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिज़र के संदर्भ में प्रभावी उपायों/व्यावहारिक समाधानों से संबं‌धित एक व्यापक स्थिति रिपोर्ट दायर करनी चाहिए।"

न्यायालय ने सुनवाई के दरमियान सरकारी वकील से आश्रय गृह/ स्थलों की पहचान के संबंध में भी विशेष रूप से पूछा, जहां परिवहन साधनों का इंतजार कर रहे प्रवासी श्रमिकों को रखा जा सके। कोर्ट ने कहा कि इन जानकारियों को आज ही सर्वाजनिक रूप से उपलब्‍ध कराया जाए।

हाईकोर्ट में दायर मौजूदा जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा था कि प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं को हल करने के लिए विभिन्न प्रशासनिक निर्देशों के रूप में कुछ स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोस‌िज़र जारी किए गए हैं,‌ हालांकि अभी तक निम्न मुद्दों का हल नहीं सुझाया गया है-

(a) ऐसे आश्रयों की सूची, जहां प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में भेजे जाने से पहले रखा जा सके।

(b) प्रवासी श्रमिकों की पंजीकरण जानकारी वेबसाइट उपलब्ध है, लेकिन उन्हें अपलोड करने की भाषा अंग्रेजी है, न कि हिंदी, ओडिया, बंगाली, भोजपुरी। संबंधित अधिकारी उक्त भाषाओं में जानकारी अपलोड करवाने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।

(c) राज्य सरकार और रेल मंत्रालय के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया था कि कुछ प्रवासी श्रमिकों के पास आधार कार्ड आदि पहचान पत्र नहीं हैं, और गैर-सरकारी संगठन, जिसमें याचिकाकर्ता भी एक पार्टी है, पंजीकरण और परिवहन के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। फिर भी कुछ समस्याएं हैं, जिन्हें संबंधित विभाग हल सकते हैं।

सरकारी वकील ने नोटिस स्वीकार करने के बाद कोर्ट का ध्यान राजस्व और आपदा प्रबंधन (डीएम- II) विभाग के 7 मई के सरकारी आदेशक की ओर आकर्षित किया, जिसमें गृह मंत्रालय के 29 अप्रैल आदेश के आधार पर व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए ‌‌थे। उन निर्देशों में प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों अंतर-राज्यीय आवागमन की चर्चा की गई है।

उक्त आदेश में राज्य सरकारों को नोडल अधिकारी तय करने को कहा गया था, जो संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय स्‍थापित कर सकें ताकि फंसे हुए लोगों का आवागमन सुनिश्चित किया जा सके। कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि रेलगाड़ियों के प्रस्थान का समय रेल मंत्रालय की वेबसाइट के साथ-साथ तमिलनाडु सरकार के राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिस‌िटर जनरल ने कहा कि "रेल मंत्रालय प्रवासी श्रमिकों के लिए कई श्रम विशेष ट्रेनों का संचालन कर रहा है, हालांकि कुछ राज्य ट्रेनों को अनुमति नहीं दे रहे हैं, इसलिए यह संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वो उस राज्य से समन्वय स्‍थापित करे।"

उन्होंने कहा, राज्य सरकार की ओर से जब भी अनुरोध किया जाएगा, रेल मंत्रालय विशेष ट्रेन उपलब्ध करवाएगा।

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