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देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डाले बिना सोने की तस्करी यूएपीए के तहत "आतंकवादी कृत्य" नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट

Sharafat
3 Jun 2022 3:33 PM GMT
देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डाले बिना सोने की तस्करी यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्य नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट
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दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि भारत की आर्थिक सुरक्षा या मौद्रिक स्थिरता को खतरे में डालने वाले किसी भी संबंध के बिना सोने की तस्करी करना गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी कृत्य नहीं हो सकता।

जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस मिनी पुष्कर्ण की खंडपीठ ने उन नौ आरोपियों को जमानत दे दी, जिन्होंने यूएपीए की धारा 16, 18, 20 और आईपीसी की धारा 120बी, 204, 409 और धारा 471 के तहत अपराधों से जुड़े मामले में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अपील दायर करके अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

अपीलकर्ताओं के खिलाफ अभियोजन का आरोप यह था कि उनमें से आठ ( एक वैभव संपत मोरे को छोड़कर) लोगों को एक ट्रेन में असम से दिल्ली जाते समय राजस्व खुफिया निदेशालय की दिल्ली जोनल यूनिट ने रोका। आरोप है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उनके पास से तस्करी कर लाए गए 83.621 किलोग्राम वजन की 504 सोने की छड़ें बरामद की गईं।

डीआरआई द्वारा अपनी जांच किए जाने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा आपराधिक साजिश के कथित अपराध के गठन, आतंकवादी गतिविधियों को आगे बढ़ाने और आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने और भारत की मौद्रिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के लिए एक आरसी दर्ज की गई। जैसा कि यूएपीए की धारा 15(1) (ए) (iiiए) के तहत आतंकवादी कृत्य यूएपीए की धारा 16 के तहत दंडनीय है।

अपीलकर्ताओं द्वारा यह तर्क दिया गया था कि अभियोजन पक्ष के पास उनके खिलाफ सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 ( 108 of the Customs Act) के तहत सीमा शुल्क अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए कथित बयानों को छोड़कर कोई सबूत नहीं है, जिस पर विचार नहीं किया जा सकता है और यूएपीए के तहत यह ट्रायल में अस्वीकार्य है जिसके लिए ट्रायल के लिए अलग प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यह भी तर्क दिया गया कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए रिकॉर्ड में कोई सामग्री नहीं है कि कथित रूप से अपीलकर्ताओं के पास सोने की छड़ें देश के बाहर से खरीदी गई थीं।

नौवें अपीलकर्ता वैभव संपत मोरे के संबंध में, यह दावा किया गया कि उसे मौके पर गिरफ्तार नहीं किया गया था और सह-अभियुक्त के बयान के अलावा उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था।

दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि सभी आठ आरोपियों ने साजिश के तहत काम किया जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि वे सभी एक साथ यात्रा कर रहे थे और उनके टिकट एक आम ट्रैवल एजेंसी द्वारा बुक किए गए थे। आगे यह भी कहा गया कि आठ आरोपियों ने डमी नामों के तहत एक ट्रेन में यात्रा की, जिससे उनकी अपराधिक मनो स्थिति ज़ाहिर होती है।

अभियोजन पक्ष ने यूएपीए की धारा 15 में संशोधन लाने के उद्देश्यों और कारणों के बयान पर भी भरोसा किया, जिसके तहत धारा 15(1)(ए)(iiiए) जोड़ी गई।

यह दिखाया गया कि देश की आर्थिक स्थिरता को भंग करके आतंकवादी कृत्यों की विस्तृत विवेचना से "आतंकवादी कृत्य" की परिभाषा में संशोधन किया गया था।

इस प्रकार यह दावा किया गया कि इस देश की आर्थिक स्थिरता को भंग करके अपीलकर्ताओं द्वारा एक आतंकवादी कृत्य करने की एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया गया और अपराध की गंभीरता को देखते हुए अपीलकर्ताओं को कोई जमानत नहीं दी जा सकती।

यह देखते हुए कि उक्त संशोधन वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (संक्षेप में FATF में) की सिफारिशों के अनुसार किया गया था, न्यायालय ने इस प्रकार देखा :

"हालांकि, यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस तथ्य के बावजूद कि रिपोर्ट विशेष रूप से सोने से संबंधित है, धारा 15 (1) (ए) (iiiए) यूएपीए में संशोधन करते समय 'गोल्ड' शब्द नहीं जोड़ा गया है। आगे कब्जा, उपयोग, उत्पादन , नकली मुद्रा या सिक्के का हस्तांतरण अपने आप में अवैध है और एक अपराध है, हालांकि, 'सोने' का उत्पादन, कब्जा, उपयोग आदि स्वयं अवैध या अपराध नहीं है।"

"यहां तक ​​कि सोने के आयात पर भी प्रतिबंध नहीं है, लेकिन शुल्क के भुगतान पर निर्धारित मात्रा के अधीन प्रतिबंधित है। इस प्रकार भारत की आर्थिक सुरक्षा या मौद्रिक स्थिरता को खतरे में डालने वाले किसी भी संबंध के बिना सोने की तस्करी आतंकवादी कृत्य नहीं हो सकता।"

अदालत ने यह भी नोट किया कि अभियोजन पक्ष के पास मुख्य सबूत यह दिखाने के लिए कि बरामद सोने की छड़ें तस्करी का सोना थीं, सीमा शुल्क के अधिकारियों द्वारा सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 के तहत दर्ज अभियुक्तों के बयान थे। .

कोर्ट का विचार था कि दिलीप लक्ष्मण पाटिल और वैभव संपत मोरे को छोड़कर सभी अपीलकर्ता 21 सितंबर, 2020 से हिरासत में हैं और उन्होंने 20 महीने से अधिक समय तक हिरासत में बिताया है।

कोर्ट ने कहा,

"मुकदमे में कुछ समय लगने की संभावना है, इस कारण से भी कि कुछ अपीलकर्ताओं ने मंजूरी देने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें दावा किया गया है कि सीमा शुल्क अधिनियम के तहत एक कथित अपराध को यूएपीए के प्रावधानों के दायरे में नहीं लाया जा सकता है।"

तदनुसार, अदालत ने नौ आरोपियों को जमानत दे दी।

केस टाइटल : वैभव संपत मोरे बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी अपने मुख्य जांच अधिकारी के माध्यम से

साइटेशन:

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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