मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य से रैट-होल खनन में शामिल लोगों को वैकल्पिक आजीविका देने के लिए योजनाएं बनाने को कहा

  • मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य से रैट-होल खनन में शामिल लोगों को वैकल्पिक आजीविका देने के लिए योजनाएं बनाने को कहा

    मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पहाड़ी राज्य में खनन में शामिल लोगों को वैकल्पिक आजीविका देने के लिए योजनाएं बनाने को कहा है।

    चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी, जस्टिस एच.एस. थंगखिएव और जस्टिस डब्ल्यू डेंगदोह की खंडपीठ ने खनन क्षेत्रों में लोगों की वैकल्पिक आजीविका की कमी पर टिप्पणी की,

    "यह लगभग एक सामाजिक अस्वस्थता है। जो लोग लंबे समय से इस तरह के खनन में शामिल हैं, उन्हें बाहर निकालना होगा और इस तरह के उद्देश्य के लिए, राज्य को योजनाओं को तैयार करना होगा और आजीविका के वैकल्पिक रूप प्रदान करना होगा।"

    राज्य में कोयले के अवैध खनन से निपटने के लिए एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश दिए।

    सुनवाई की अंतिम तारीख को पारित न्यायालय के आदेशों के अनुसरण में डिप्टी सॉलिसिटर-जनरल ने अदालत को बताया कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की भूमिका प्रतिष्ठानों और भवनों की रखवाली करना है और वास्तव में पुलिस का काम नहीं करना है।

    हालांकि, उन्होंने प्रस्तुत किया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल राज्य पुलिस द्वारा सामान्य रूप से की जाने वाली पुलिस ड्यूटी को बढ़ाने के लिए उपलब्ध है। आगे कहा कि आवश्यकता पड़ने पर उक्त बल की कंपनियां और बटालियन शिलॉन्ग और गुवाहाटी दोनों में उपलब्ध हैं।

    कोर्ट ने देखा कि राज्य प्रतिबंध को लागू करने या अवैध परिवहन की जांच करने में अप्रभावी रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि आगे की निगरानी में कम भूमिका दी जानी चाहिए। इस संबंध में सीआरपीएफ की अधिक आक्रामक भूमिका हो सकती है।

    बेंच ने कहा,

    "राज्य रैट-होल माइनिंग और हाल ही में अवैध रूप से खनन किए गए कोयले के परिवहन सहित कोयले के अवैज्ञानिक खनन पर रोक की प्रभावी निगरानी और जांच के लिए आवश्यक (सीपीएफ) कर्मियों की कंपनियों की आदर्श संख्या का संकेत देगा।"

    उच्च न्यायालय ने मेघालय सरकार को राज्य में कोयले के अवैध खनन और परिवहन की प्रभावी निगरानी और जांच के लिए आवश्यक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कर्मियों की संख्या इंगित करने का भी निर्देश दिया।

    पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के एसपी के खिलाफ अवमानना नियम को जीवित रखते हुए, अदालत ने उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति को समाप्त कर दिया, क्योंकि विशेष रूप से चुनावी मौसम के दौरान उन्हें मैदान में रहने की आवश्यकता होती है।

    अदालत ने कहा,

    "पुलिस अधीक्षक को विशेष रूप से बुलाए जाने पर अदालत में पेश होना आवश्यक होगा।“

    पीठ ने आगे विचार के लिए जनहित याचिका को फिर से 28 फरवरी को सूचीबद्ध किया।

    केस टाइटल: मेघालय राज्य बनाम मेघालय राज्य में कोयले के अवैध खनन का स्वत: संज्ञान

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