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एमसीजीएम और राज्य लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष हेल्पलाइन शुरू करने पर ग़ौर करने को कहा

LiveLaw News Network
26 May 2020 5:05 AM GMT
एमसीजीएम और राज्य लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष हेल्पलाइन शुरू करने पर ग़ौर करने को कहा
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एमसीजीएम और राज्य लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरा है, बॉम्बे हाईकोर्ट ने गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष हेल्पलाइन शुरू करने पर ग़ौर करने को कहा

बॉम्बे हाईकोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें कहा गया था कि एक गर्भवती महिला को COVID-19 का संक्रमण नहीं होने का प्रमाणपत्र के अभाव में जेजे अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि एमसीजीएम और राज्य सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैंं और कहा कि उसे बताया गया है कि मार्च 2020 से अब तक अस्पताल ने 10 हज़ार डिलीवरी के केस हैंडल किए हैं। इससे पूर्व हुई सुनवाई में अदालत ने एमसीजीएम और राज्य को इस याचिका पर अगली सुनवाई तक जवाब देने को कहा था।

न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति एसएस शिंदे की खंडपीठ एमसीजीएम और राज्य के जवाब पर ग़ौर करते हुए उपरोक्त बात कही। यह याचिका वक़ील मोहिउद्दीन वैद ने दायर की है।

याचिका में मीडिया की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि एक गर्भवती महिला को जेजे अस्पताल में इस आधार पर भर्ती नहीं किया गया क्योंकि वह COVID-19 का संक्रमण नहीं होने का प्रमाणपत्र नहीं दे पाई। उसे ढोलकवाला अस्पताल में भी भर्ती नहीं किया गया और बाद में एक महिला की मदद से उसकी डिलीवरी करायी गई।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह राज्य और एमसीजीएम को बाध्यकारी निर्देश देने को कहा ताकि COVID-19 के समय में वे अन्य मरीज़ों को भी नियमित रूप से भर्ती करें।

जिस महिला का ज़िक्र किया है, राज्य ने कहा कि उसके बारे में कोई विवरण उसे नहीं मिला है और जेजे अस्पताल में इस बारे में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। राज्य ने यह भी बताया कि जेजे अस्पताल में COVID-19 के मरीज़ नहीं लाए जाते हैं।

एमसीजीएम ने अपने जवाब में कहा है कि मार्च में 3905, अप्रैल में 4169 और मई में अब तक 2412 डिलीवरी कराए जा चुके हैं और इनमें से 359 मरीज़ COVID-19 से संक्रमित थे।

हलफनामों पर ग़ौर करने के बाद अदालत ने कहा,

"हमें इस बात की ख़ुशी है कि निगम और राज्य जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में सफल रहे हैं। पिछले तीन महीनों में जितनी संख्या में डिलीवरी कराए गए हैं उससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि सखारे और चव्हाण ने जो तथ्य पेश किए हैं वे पुख़्ता हैं और किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है और इसलिए किसी तरह के न्यायिक हस्तक्षेप की इस मामले में ज़रूरत नहीं है।"

इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि गर्भवती महिलाओं कि लिए विशेष रूप से एक हेल्पलाइन नंबर चलाना चाहिए। इस पर एवाई सखारे ने कहा कि निगम ने हेल्पलाइन नंबर 1916 उपलब्ध कराया है जो COVID-19/और अन्य दोनों ही तरह के मरीज़ों के लिए है और इसमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं और इस हेल्पलाइन नंबर पर डॉक्टर उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के आग्रह को इस समय स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने अंत में इस याचिका का निस्तारन करते हुए कहा कि उसे उम्मीद है कि राज्य और निगम इस मुश्किल समय में भी गर्भवती महिलाओं की मदद जारी रखेंगे…।"

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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