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लॉकडाउन प्रथमदृष्ट्या अप्रत्याशित घटना : दिल्ली हाईकोर्ट ने बैंक गारंटी भुनाने पर रोक लगायी

LiveLaw News Network
22 April 2020 5:00 AM GMT
लॉकडाउन प्रथमदृष्ट्या अप्रत्याशित घटना : दिल्ली हाईकोर्ट ने बैंक गारंटी भुनाने पर रोक लगायी
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दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉकडाउन को प्रथमदृष्ट्या अप्रत्याशित घटना करार देते हुए बैंक गारंटी भुनाने पर रोक का अंतरिम आदेश जारी किया।

न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने अपने आदेश में कहा,

"मेरे विचार से, 24 मार्च से लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन अप्रत्याशित घटना की तरह है। मेरा मत है कि लॉकडाउन समाप्ति की तारीख 03 मई 2020 के एक सप्ताह बाद तक बैंक गारंटी मांगने से प्रतिवादी को रोकने का याचिकाकर्ता का अनुरोध स्वीकार करना उचित होगा, क्योंकि इस मामले में विशेष निष्पक्षता (स्पेशल इक्विटीज) का मुद्दा निहित है।"

यह आदेश मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा-9 के तहत हैलिबर्टन ऑफशोर सर्विसेज इंक द्वारा दायर अर्जी पर आया है, जिसमें उसने वेदांता लिमिटेड को पेट्रोलियम कुओं की खुदाई से संबंधित करार के तहत निर्धारित रकम की अदायगी सुरक्षित करने के लिए जारी आठ बैंक गारंटियों को भुनाने से रोकने का अनुरोध किया था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने दलील दी कि करार राशि का व्यापक हिस्सा दिया जा चुका है और शेष रकम की अदायगी में विलंब कोरोना वायरस 'COVID 19' महामारी को लेकर जारी राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण विलम्ब की वजह से हुआ है।

वेदांता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कोर्ट अपवाद की स्थिति में ही बैंक गारंटी भुनाने पर रोक लगा सकता है, जैसे- धोखधड़ी। उन्होंने आगे दलील दी कि अप्रत्याशित घटना या प्राकृतिक आपदा जैसी अर्जी बाद में ढूंढा गया तरीका है और इसे अंतरिम रोक की मंजूरी का न्यायोचित आधार नहीं बनाया जा सकता।

न्यायमूर्ति हरिशंकर ने इन दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि 'असाध्य नुकसान' से रोकने के लिए 'स्पेशल इक्विटीज' सिद्धांत के आधार पर बैंक गारंटी के भुनाने पर रोक लगाने का कोर्ट को अधिकार है।

जज ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक लिमिटेड बनाम हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा,

"इस बात को लेकर कोई प्रतिवाद नहीं लगता कि जहां 'स्पेशल इक्विटीज' निहित हों, कुछ तथ्यों एवं परिस्थितियों के दायरे में कोर्ट बैंक गारंटी को भुनाने से रोकने का आदेश देने को अधिकृत है।"

कोर्ट ने यह भी कहा कि लॉकडाउन की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

"आज हम असुविधाजनक तरीके से विचित्र परिस्थितियों में फंसे हैं। आज पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाली प्रकृति की यह महामारी हममें से किसी ने भी अपने जीवनकाल में नहीं देखी होगी और इसके बाद कभी देखने को मिले भी न। इसके कारण हुई मानवीय, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तबाही अभूतपूर्व है। इस महामारी की तबाही को थामने के लिए कार्यकारी प्रशासन ने जो उपाय किये हैं, वे भी उतने ही अभूतपूर्व हैं। जिस राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की स्थिति में हम खुद को पाते हैं, वैसा पहले देश पर कभी नहीं थोपा गया। लॉकडाउन की घोषणा अचानक और आपात उपाय के तौर पर की गयी, जिसकी याचिकाकर्ता को पहले से जानकारी नहीं थी, निश्चित तौर पर किसी अन्य को भी नहीं।"

'पेट्रोलियम' को लॉकडाउन से छूट वाली श्रेणी में होने की डॉ. सिंघवी की दलील पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पेट्रोलियम के उत्पादन में शामिल नहीं है, बल्कि वह पेट्रोलियम कुओं की खुदाई में शामिल है।

"प्रथमदृष्ट्या श्री सेठी की उन दलीलों में तथ्य मौजूद हैं कि भले ही पेट्रोलियम को आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की श्रेणी में रखा गया है उसके उत्पादन संबंधी गतिविधि को लॉकडाउन के दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन सही मायनों में याचिकाकर्ता पेट्रोलियम उत्पादन से संबद्ध नहीं है, बल्कि वह पेट्रोलियम कुओं की खुदाई से जुड़ा है, जिसकी गतिविधि पूरी तरह नहीं तो व्यापक तौर पर लॉकडाउन से बाधित है।"

कोर्ट ने यह कहते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान की '

"फिलहाल मैँ प्रथमदृष्ट्या याचिकाकर्ता की उन दलीलों से आश्वस्त हूं कि कंपनी 22 मार्च को लॉकडाउन किये जाने या उससे बिल्कुल पहले तक परियोजना पर काम कर रही थी और अचानक एवं आपात तरीके से लॉकडाउन की घोषणा के मद्देनजर लॉकडाउन समाप्त होने की अवधि तीन मई 2020 के ठीक एक सप्ताह बाद तक उपरोक्त आठ बैंक गारंटी मांगने या भुनाने से प्रतिवादी को रोकना या अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करना ही न्याय के हित में होगा।"

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह बैंक गारंटी के एक मामले में लॉकडाउन संबंधी अप्रत्याशित घटना का लाभ स्टील आयातकों को देने से इन कर दिया था।



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