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अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग : कर्नाटक हाईकोर्ट ने नियम बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
15 Sep 2021 9:08 AM GMT
अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग : कर्नाटक हाईकोर्ट ने नियम बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को रजिस्ट्रार जनरल को अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए नियम बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,

"उच्च न्यायालय की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता द्वारा इस न्यायालय के संज्ञान में लाया गया है कि लाइव स्ट्रीमिंग नियम उच्च न्यायालय समिति के समक्ष लंबित हैं, रजिस्ट्रार को प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया जाता है।"

हाईकोर्ट की ओर से पेश अधिवक्ता बी वी विद्युतुलता ने अदालत को सूचित किया कि अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए मसौदा नियम उच्च न्यायालय समिति के समक्ष लंबित है। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख पर, उच्च न्यायालय लाइव स्ट्रीमिंग के संबंध में कर्नाटक में हुई प्रगति की जानकारी देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सैद्धांतिक रूप से 2018 में महत्वपूर्ण अदालती सुनवाई की लाइव-स्ट्रीमिंग की अवधारणा को मंजूरी दी थी। हालांकि, इसे अभी लागू किया जाना बाकी है। गुजरात उच्च न्यायालय एकमात्र ऐसा न्यायालय है जो YouTube के माध्यम से कार्यवाही का सीधा प्रसारण करता है। हाल ही में, कुछ मामलों में सुनवाई के आधार पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अदालत से कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया गया था।

पीठ ने यह भी कहा कि मामलों की ई-फाइलिंग की सुविधा के संबंध में, यह सुविधा कर्नाटक राज्य के सभी अदालती प्रतिष्ठानों में उपलब्ध है। अदालत ने 2019 में एडवोकेट दिलराज रोहित सिकेरा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश जारी किया, जिसमें ई-फाइलिंग सुविधा की मांग की गई थी।

रजिस्ट्रार (कंप्यूटर) द्वारा अदालत को प्रस्तुत एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, यह नोट किया गया था कि पोर्टल के माध्यम से ई-फाइलिंग सुविधा बहुत पहले ही सक्षम कर दी गई थी, लेकिन बार के बहुत कम सदस्यों ने इसका लाभ उठाया है। रिपोर्ट में आगे यह भी दर्ज किया गया है कि जिन पक्षों ने 13 जुलाई 2021 को ई-फाइलिंग पोर्टल पर खुद को उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकृत किया है, वे अधिवक्ताओं की तुलना में बहुत अधिक हैं।

केस शीर्षक: दिलराज रोहित सिकेरा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया

केस नंबर: 50883/2019

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