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केरल हाईकोर्ट ने 2019 में रैश ड्राइविंग मामले में आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप हटाने के सत्र न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई

Shahadat
25 Nov 2022 10:27 AM GMT
केरल हाईकोर्ट ने 2019 में रैश ड्राइविंग मामले में आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप हटाने के सत्र न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई
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केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2019 के रैश ड्राइविंग मामले में आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमन के गैर इरादतन हत्या के आरोप को हटाने के आदेश पर रोक लगा दी।

जस्टिस जियाद रहमान ए.ए. ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय I, त्रिवेंद्रम द्वारा पारित आदेश के खिलाफ राज्य की अपील को स्वीकार करते हुए कहा:

"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैं अंतरिम आदेश पारित करने का इच्छुक हूं। तदनुसार, यह आदेश दिया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के केस नंबर 595/2021 में सीआरएल एमपी 2325/2022 में आदेश के संचालन पर दिनांक 19.10.2022 से दो महीने की रोक जारी रहेगा।"

कोर्ट ने यहां प्रतिवादी को नोटिस भी जारी किया है।

2019 में पत्रकार के.एम. बशीर की मौत से संबंधित कथित शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में वेंकटरमण और उनके दोस्त वफा फिरोज के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के आरोप खारिज करने के त्रिवेंद्रम के अतिरिक्त सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सत्र न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 और धारा 201 के तहत आरोपों को खारिज करते हुए पिछले महीने यह सुनिश्चित किया कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए और धारा 279 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 मान्य के आरोप मान्य होंगे। वेंकटरमण ने तर्क दिया कि उनके द्वारा नशे की हालत में वाहन चलाने के बारे में कोई सबूत नहीं है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक के माध्यम से दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका में यह दावा किया गया कि गवाहों के बयानों से पता चला है कि आरोपी घटना के समय नशे की हालत में था और सबूत नष्ट करने के लिए अपना ब्लड सैंपल देने का अनिच्छुक था। इसके अलावा, दुर्घटना के दिन जब उन्हें सामान्य अस्पताल ले जाया गया, तब उन्होंने इलाज में देरी करने के लिए इस संबंध में सभी प्रयास किए।

अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि सामान्य अस्पताल के डॉक्टर ने आरोपी को सर्जन से परामर्श करने के लिए कहा और उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल, तिरुवनंतपुरम रेफर कर दिया। हालांकि, उन्होंने उसकी उपेक्षा की और पुलिस को सूचित किए बिना केआईएमएस अस्पताल तिरुवनंतपुरम चले गए। यह भी कहा गया कि अभियुक्त ने अपने ब्लड में अल्कोहल की मात्रा को कम करने के लिए अपने ब्लड सैंपल देने में "जानबूझकर देरी" की और निचली अदालत इस पर विचार करने में विफल रही।

याचिका में कहा गया,

"मामला के प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि पहला आरोपी शराब का सेवन करने के बाद नशे की हालत में थे। डॉक्टर और सिविल सेवक होने के नाते वह प्राकृतिक परिणामों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। यदि ऐसा है तो और यदि यह मृत्यु का कारण बनता है तो यह न केवल कृत्य के लिए बल्कि सदोष मानव वध के लिए भी सजा योग्य मामला आईपीसी की धारा 304 के तहत आ सकता है। मनुष्य को बिना किसी इरादे के संभावित परिणामों का ज्ञान हो सकता है। इसलिए निचली अदालत को आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोपी के ट्रायल के लिए आगे बढ़ना चाहिए।"

मुकदमा

2019 में पत्रकार के.एम. बशीर केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के संग्रहालय जंक्शन पर वेंकटरमण द्वारा तेज गति से चलाए जा रहे वाहन द्वारा कुचलने से कथित तौर पर मौत हो गई। ऐसा आरोप लगाया गया कि वेंकटरमन फिरोज़ के साथ थे और वह नशे की हालत में थे, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई।

कहा जाता है कि डॉक्टरों ने उनके नशे की हालत की पुष्टि की। हालांकि, बाद में यह खुलासा हुआ कि उनके खून की जांच करने में चूक हुई। बताया जा रहा है कि घटना के दस घंटे बाद ही ब्लड सैंपल लिया गया।

जबकि वेंकटरमन को घटना के तुरंत बाद सेवा से निलंबित कर दिया गया, बाद में उन्हें अलप्पुझा के जिला कलेक्टर के रूप में बहाल कर दिया गया। हालांकि बाद में विरोध होने पर उन्हें पद से हटा दिया गया और वर्तमान में वह सप्लाईको के महाप्रबंधक हैं।

केस टाइटल: केरल राज्य बनाम श्रीराम वेंकटरमन

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