कुपवाड़ा हिरासत प्रताड़ना मामला: DSP को राहत 7 पुलिसकर्मियों पर चलेगा मुकदमा

Amir Ahmad

25 April 2026 3:25 PM IST

  • कुपवाड़ा हिरासत प्रताड़ना मामला: DSP को राहत 7 पुलिसकर्मियों पर चलेगा मुकदमा

    जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा स्थित प्रिंसिपल सेशन कोर्ट ने हिरासत में कथित यातना के चर्चित मामले में एक DSP को आरोपों से मुक्त किया, जबकि सात अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि केवल पर्यवेक्षी पद पर होना, बिना किसी प्रत्यक्ष या परोक्ष संलिप्तता के प्रमाण के आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

    यह मामला फरवरी, 2023 में संयुक्त पूछताछ केंद्र, कुपवाड़ा में एक पुलिस कांस्टेबल की कथित अवैध हिरासत और बर्बर पिटाई से जुड़ा है। मामले की सुनवाई प्रधान सत्र जज एस. ए. कलंदर ने की।

    अदालत ने कहा,

    “केवल वरिष्ठ या पर्यवेक्षी भूमिका में होना अपने आप में आपराधिक दायित्व तय करने का आधार नहीं बन सकता, जब तक यह न दिखे कि संबंधित अधिकारी को जानकारी थी और उसने सक्रिय या निष्क्रिय रूप से भागीदारी की।”

    मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI ने की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में पीड़ित को 50 लाख रुपये मुआवजा देते हुए कहा था कि उसके साथ हुई क्रूरता मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जननांगों को गंभीर क्षति पहुंचाना, मिर्च पाउडर और बिजली के झटके देना अमानवीय यातना के गंभीर उदाहरण हैं।

    CBI ने जांच के बाद आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। आरोप था कि पीड़ित को 20 से 26 फरवरी 2023 तक अवैध रूप से हिरासत में रखकर मादक पदार्थ तस्करी के मामले में कबूलनामा कराने के लिए प्रताड़ित किया गया।

    मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित के शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें पाई गईं और विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड ने इन्हें हिरासत में यातना से जुड़ी चोटें बताया।

    हालांकि, अदालत ने DSP के खिलाफ पर्याप्त सामग्री न पाते हुए उन्हें आरोपमुक्त किया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि DSP ने प्रताड़ना में भाग लिया उसका निर्देश दिया या उसे रोकने में जानबूझकर चूक की।

    वहीं, अन्य सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत ने पाया कि उनके विरुद्ध प्रत्यक्ष, विशिष्ट और मेडिकल साक्ष्यों से समर्थित आरोप मौजूद हैं। अदालत ने कहा कि हिरासत में व्यक्ति को चोट लगना अपने आप में गंभीर परिस्थिति है और इसकी जिम्मेदारी हिरासत नियंत्रित करने वाले अधिकारियों पर बनती है।

    इसके साथ ही अदालत ने सातों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, गलत तरीके से हिरासत में रखने, गंभीर चोट पहुंचाने और स्वीकारोक्ति के लिए यातना देने समेत विभिन्न धाराओं में आरोप तय करने का आदेश दिया।

    Next Story