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कर्नाटक हाईकोर्ट ने VTU द्वारा ऑफलाइन मोड में परीक्षा आयोजित करने के फैसले के खिलाफ छात्रों द्वारा दायर की गई याचिका पर नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
13 Jan 2021 10:07 AM GMT
कर्नाटक हाईकोर्ट ने VTU द्वारा ऑफलाइन मोड में परीक्षा आयोजित करने के फैसले के खिलाफ छात्रों द्वारा दायर की गई याचिका पर नोटिस जारी किया
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें अगले सप्ताह तक प्रतिवादी को जवाब देना है। दरअसल, विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ने ऑफलाइन मोड में सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया है। इसके खिलाफ यूनिवर्सिटी के ही छात्रों द्वारा कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई और यूनिवर्सिटी के इस फैसले को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति आर देवदास की एकल पीठ ने 120 छात्रों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। याचिका में यूनिवर्सिटी के ऑफलाइन मोड में परीक्षा आयोजित करने की अधिसूचना को खत्म करने की मांग की गई है। इसके साथ ही यह प्रार्थना किया गया कि परीक्षा ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाए या छात्रों का मूल्यांकन कुछ अन्य वैकल्पिक मोड के आधार पर किया जाए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता तन्वी दुबे ने कहा,

"हम परीक्षा रद्द करने के लिए नहीं कह रहे हैं। यूनिवर्सिटी से केवल यह अनुरोध कर रहे हैं कि परीक्षा के संचालन के तरीके को बदल दिया जाए। अगर परीक्षा ऑफलाइन मोड में होगी, तो हजारों छात्रों को बेंगलूरु जाना पड़ेगा। COVID-19 महामारी में इस तरह छात्रों द्वारा यात्रा करना सही नहीं होगा। छात्रों को काफी तकलीफ झेलनी पड़ेगी।"

कोर्ट ने कहा कि,

"कोर्ट को इस तरह के फैसले लेने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों को स्थिति के बारे में पता है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के आधार पर ही यूनिवर्सिटी की एडमिशन प्रक्रिया पूरी की गई है। हम भी सिविल जजों और जिला जजों की परीक्षाएं केवल ऑफलाइन मोड में ले रहे हैं। सिर्फ आपकी कुछ आशंकाओं के चलते हम यूनिवर्सिटी को उनके प्रक्रिया के अनुसार काम करने से नहीं रोक सकते हैं।"

इसके बाद, पीठ ने नोटिस जारी करने का फैसला किया।

छात्रों ने कहा है कि,

"यदि परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में आयोजित की जाती हैं, तो कई छात्रों को विभिन्न देशों और राज्यों से यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे COVID-19 और नए स्ट्रेन वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।"

आगे कहा कि,

"इसके साथ ही यह तथ्य भी ध्यान में रखना जरूरी है कि राज्य में नए स्ट्रेन वायरस के 10 से अधिक मामले एक ही सप्ताह में आ चुके हैं। अंतिम सेमेस्टर परीक्षा का अनिवार्य रूप से ऑफलाइन मोड में आयोजित करना, परीक्षार्थियों को भारी जोखिम में डालना होगा। यह छात्रों के स्वास्थ्य के बुनियादी सिद्धांत यानी राइट टू हेल्थ का उल्लंघन है, जो जीवन के अधिकार का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि,

यूनिवर्सिटी के इस तरह के निर्णय उनकी मनमानी को दर्शाता है। यह निर्णय निष्पक्ष नहीं है और न ही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है। इस तरह का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। आगे बताया गया है कि विश्वविद्यालय का निर्णय 6 जुलाई की संशोधित यूजीसी दिशानिर्देशों के विपरीत है। इसमें यह प्रावधान किया गया था कि COVID-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए निर्धारित प्रोटोकॉल दिशनिर्देश के मुताबिक टर्मिनल सेमेस्टर/अंतिम वर्ष की परीक्षा सितंबर 2020 के अंत तक ऑफलाइन (पेन और पेपर) या ऑनलाइन मोड या मिश्रित (ऑनलाइन + ऑफ़लाइन) मोड में आयोजित किया जा सकता है।

आगे कहा कि,

"इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि COVID-19 से जुड़े जोखिमों के मद्देनजर, UGC के दिशानिर्देशों ने भी COVID-19 महामारी से संबंधित निर्धारित प्रोटोकॉल दिशानिर्देशों का पालन करते हुए परीक्षा के संचालन के लिए ऑफ़लाइन / ऑनलाइन / मिश्रित (ऑनलाइन + ऑफलाइन) मोड का विकल्प दिया गया है।"

इसके साथ ही यह भी कहा गया कि,

"चूंकि सभी सत्र, कक्षाएं और प्रयोगशालाएं ऑनलाइन मोड में आयोजित की गई हैं और अगले सेमेस्टर के लिए भी ऑनलाइन मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, इसलिए कोई कारण नहीं है कि परीक्षा ऑफलाइन मोड में आयोजित की जानी चाहिए।"

इसलिए याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से विश्वविद्यालय को अपने परिपत्र दिनांक 09.12.2020 को संशोधित करने और ऑनलाइन मोड में परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन छात्रों को ऑनलाइन मोड में परीक्षा देने की अनुमति दी जाए, जो खराब स्वास्थ्य के कारण सेल्फ क्वारैंटाइन हैं और जो दिनांक 09.12.2020 को ऑफलाइन मोड में परीक्षा देने में असमर्थ हैं। छात्रों के पिछले प्रदर्शन के आधार पर छात्रों के मूल्यांकन के लिए मापदंडों का एक सेट प्रस्तुत किया जाए और पिछले सेमेस्टर के प्रदर्शन के आधार पर सभी सेमेस्टर के कुल अंकों को मिलाकर औसत निकाल जाए और उसके अनुसार सभी छात्रों को प्रमोट किया जाए।

अंत में, छात्रों ने कोर्ट से न्याय और समानता के आधार पर 14.01.2021 को निर्धारित परीक्षा के संचालन पर रोक लगाने का आग्रह किया है।

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