मनी लॉन्ड्रिंग मामला: पूर्व विधायक धर्म सिंह छौक्कर की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- आरोपों की प्रकृति गंभीर
Amir Ahmad
9 April 2026 12:03 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में फंसे पूर्व विधायक धर्म सिंह छौक्कर को करारा झटका दिया। अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज की कि उनके खिलाफ लगे आरोपों की प्रकृति, लेन-देन का तरीका और जांच के दौरान जुटाए गए सबूत उन्हें इस स्तर पर रिहा करने की अनुमति नहीं देते।
मामला
यह मामला गुरुग्राम में माहिरा ग्रुप की कंपनियों द्वारा शुरू किए गए अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, धर्म सिंह छौक्कर और उनके परिवार के नियंत्रण वाली कंपनियों ने घर खरीदारों से करोड़ों रुपये जुटाए थे। आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल प्रोजेक्ट निर्माण में करने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया। जांच में सामने आया है कि याचिकाकर्ता ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर लगभग 616 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की हेराफेरी की और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कई गंभीर पहलुओं पर गौर किया। अदालत ने पाया कि धर्म सिंह छौक्कर न केवल इन कंपनियों से सक्रिय रूप से जुड़े थे, बल्कि वे बैलेंस शीट साइन करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस ने याचिकाकर्ता के आचरण पर भी सवाल उठाए।
अदालत ने नोट किया,
जांच के दौरान जारी किए गए समन का याचिकाकर्ता ने बार-बार उल्लंघन किया।
कई बार बुलाए जाने के बावजूद वे पेश नहीं हुए, जिसके कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने पड़े।
गिरफ्तारी के प्रयासों के दौरान वे अपने आवास पर नहीं मिले और अंततः दिल्ली के होटल से भागने की कोशिश करते समय पकड़े गए।
छौक्कर की ओर से दलील दी गई कि वे एक सीनियर सिटीजन हैं, समाज में उनकी गहरी जड़ें हैं और उन्होंने जांच में सहयोग किया। यह भी तर्क दिया गया कि मुकदमे की सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए। हालांकि, ED ने इन दलीलों का कड़ा विरोध करते हुए अपराध की गंभीरता और 'पीएमएलए' (PMLA) की धारा 45 की सख्त शर्तों का हवाला दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 4 मई 2025 से अब तक की हिरासत अवधि को बहुत अधिक नहीं माना जा सकता।
जस्टिस ने कहा,
"हिरासत की अवधि को इतना पर्याप्त नहीं माना जा सकता कि याचिकाकर्ता मेरिट के आधार पर जमानत का हकदार हो जाए, विशेषकर तब जब PMLA की धारा 45 के तहत अनिवार्य शर्तों का पालन किया जाना बाकी हो।"
याचिकाकर्ता ने एक अन्य सह-आरोपी को मिली जमानत के आधार पर समानता (पैरिटी) की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उस जमानत आदेश को चुनौती दी गई और जमानत को समानता के अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता।
सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक की जमानत अर्जी को खारिज किया, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। अब इस मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

