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कानून के छात्रों के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था बार काउंसिल और लॉ स्कूलों द्वारा की जायेगी : दिल्ली हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
7 Feb 2020 3:20 AM GMT
कानून के छात्रों के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था बार काउंसिल और लॉ स्कूलों द्वारा की जायेगी : दिल्ली हाईकोर्ट
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एमिटी लॉ स्कूल के छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या के बाद स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किये गये मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वस्त किया है कि काउंसिल और लॉ स्कूल सभी विधि छात्रों के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था करेंगे।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति नज़मी वज़ीरी की खंडपीठ ने बीसीआई की ओर से पेश वकील का निवेदन इस प्रकार रिकॉर्ड पर लिया-

"वह (बार काउंसिल) कोर्ट को आश्वस्त करता है कि अब से बार काउंसिल यह सुनिश्चित करेगा कि इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट की व्यवस्था बीसीआई और लॉ स्कूल खुद करेंगे तथा छात्रों को नियामक संस्थाओं, सरकारी संस्थानों, लॉ फर्म्स, वकीलों आदि के यहां अपने इंटर्नशिप की व्यवस्था खुद करने की जरूरत नहीं होगी।"

इस आश्वासन के मद्देनजर, कोर्ट ने उन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची रिकॉर्ड में लाने के लिए बार काउंसिल को समय दिया, जिन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के पार्ट-4, शिड्यूल-III के नियम 26 के तहत विधि छात्रों को इंटर्नशिप देने को तैयार हुए हैं।

यह मामला एमिटी लॉ स्कूल के थर्ड ईयर के विधि छात्र सुशांत रोहिल्ला से जुड़ा है, जिसने 2016 में इसलिए आत्महत्या कर ली थी क्योंकि उसे कम उपस्थिति के कारण सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गयी थी।

उसके बाद, यह भी आरोप था कि रोहिल्ला को एमिटी लॉ स्कूल ने परेशान किया था। एमिटी के ही विधि छात्र एवं रोहिल्ला के दोस्त राघव शर्मा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर सुशांत को आत्महत्या को मजबूर करने के लिए एमिटी के पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमा शुरू करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पत्र का संज्ञान लिया था और मई 2017 में यह मामला सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट को भेज दिया था।

अपने मौजूदा आदेश के जरिये, कोर्ट ने बीसीआई को यह विस्तृत ब्योरा देने को भी कहा है कि काउंसिल कैसे सुनिश्चित करेगी कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के पार्ट-IV नियम 10 के संदर्भ में प्रत्येक सेमेस्टर में विधि छात्रों के लिए आवश्यक क्लासेज निश्चित तौर पर विधि स्कूलों द्वारा लगाये जा सकें।

इस मामले की सुनवाई आज सात फरवरी को होगी।

एमिटी लॉ स्कूल के छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या के बाद स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किये गये मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वस्त किया है कि काउंसिल और लॉ स्कूल सभी विधि छात्रों के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था करेंगे।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति नज़मी वज़ीरी की खंडपीठ ने बीसीआई की ओर से पेश वकील का निवेदन इस प्रकार रिकॉर्ड पर लिया-

"वह (बार काउंसिल) कोर्ट को आश्वस्त करता है कि अब से बार काउंसिल यह सुनिश्चित करेगा कि इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट की व्यवस्था बीसीआई और लॉ स्कूल खुद करेंगे तथा छात्रों को नियामक संस्थाओं, सरकारी संस्थानों, लॉ फर्म्स, वकीलों आदि के यहां अपने इंटर्नशिप की व्यवस्था खुद करने की जरूरत नहीं होगी।"

इस आश्वासन के मद्देनजर, कोर्ट ने उन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची रिकॉर्ड में लाने के लिए बार काउंसिल को समय दिया, जिन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के पार्ट-4, शिड्यूल-III के नियम 26 के तहत विधि छात्रों को इंटर्नशिप देने को तैयार हुए हैं।

यह मामला एमिटी लॉ स्कूल के थर्ड ईयर के विधि छात्र सुशांत रोहिल्ला से जुड़ा है, जिसने 2016 में इसलिए आत्महत्या कर ली थी क्योंकि उसे कम उपस्थिति के कारण सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गयी थी।

उसके बाद, यह भी आरोप था कि रोहिल्ला को एमिटी लॉ स्कूल ने परेशान किया था। एमिटी के ही विधि छात्र एवं रोहिल्ला के दोस्त राघव शर्मा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर सुशांत को आत्महत्या को मजबूर करने के लिए एमिटी के पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमा शुरू करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पत्र का संज्ञान लिया था और मई 2017 में यह मामला सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट को भेज दिया था।

अपने मौजूदा आदेश के जरिये, कोर्ट ने बीसीआई को यह विस्तृत ब्योरा देने को भी कहा है कि काउंसिल कैसे सुनिश्चित करेगी कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के पार्ट-IV नियम 10 के संदर्भ में प्रत्येक सेमेस्टर में विधि छात्रों के लिए आवश्यक क्लासेज निश्चित तौर पर विधि स्कूलों द्वारा लगाये जा सकें।

इस मामले की सुनवाई आज सात फरवरी को होगी।

केस का ब्योरा

केस का नाम : आईपी यूनिवर्सिटी के विधि छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या के मामले में स्वत: संज्ञान

केस नं: रिट याचिका (क्रिमिनल) 793/2017

कोरम: न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल एवं न्यायमूर्ति नज़मी वज़ीरी

वकील : सीनियर एडवोकेट दयान कृष्णन (न्याय मित्र) सहयोग- एडवोकेट आकाशी लोढा, संजीवी शेषाद्रि, निहारिका कौल/

वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिबल, सहयोग- एडवोकेट राजन चावला, तन्मया मेहता,गौतम चौहान (एमिटी के लिए), स्टैंडिंग काउंसेल हर्ष कुमार शर्मा सहयोग- वैभवी शर्मा, लक्ष्य पराशर, रोहित गौर (बीसीआई के लिए)


आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




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