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मुंबई जैसे शहर में रात में 1.30 बजे सड़कों पर घूमना कोई अपराध नहीं: मुंबई कोर्ट

Brij Nandan
21 Jun 2022 3:57 AM GMT
मुंबई जैसे शहर में रात में 1.30 बजे सड़कों पर घूमना कोई अपराध नहीं: मुंबई कोर्ट
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दक्षिण मुंबई की एक स्ट्रीट से रात में 1.30 बजे गिरफ्तार एक व्यक्ति को रिहा करते हुए मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा कि मुंबई जैसे शहर में 1.30 बजे सड़कों पर घूमना कोई अपराध नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि यह तभी अपराध होगा जब रात में कर्फ्यू हो।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (एमएम) नदीम ए पटेल ने कहा,

"मुंबई जैसे शहर में रात में 1:30 बजे भी कोई देर नहीं है। सड़क के पास कोई भी खड़ा हो सकता है, भले ही यह मान लिया जाए कि 01:30 बजे बहुत देर हो चुकी है, फिर भी सड़कों पर घूमना अपराध नहीं है जब रात में कर्फ्यू नहीं लगाया गया हो।"

आगे कहा,

"जाहिर है कि मुंबई में रात में कर्फ्यू नहीं है, इसलिए अगर कोई सड़क पर खड़ा है, तो यह अपराध नहीं है।"

16 जून, 2022 को अदालत ने दक्षिण-मुंबई के कैडबरी जंक्शन से तीन दिन पहले गिरफ्तार किए गए 29 वर्षीय उत्तर प्रदेश निवासी सुमित-कुमार कश्यप को बरी कर दिया। पुलिस ने उस पर सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच संदिग्ध परिस्थितियों में बैठने, बिना किसी स्पष्टीकरण के अपनी पहचान और अपने चेहरे को छिपाने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह एक अपराध करना चाहता है। उस पर महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 122 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दो गवाहों से पूछताछ की गई। पहला, नाइट ड्यूटी पर तैनात पेट्रोलिंग अधिकारी जिसने उसे गिरफ्तार किया और दूसरा पंच गवाह।

मजिस्ट्रेट ने व्यक्ति को निम्नलिखित कारणों से बरी कर दिया।

सबसे पहले, किसी भी गवाह ने उस अपराध का उल्लेख नहीं किया जिसे आरोपी करने का इरादा रखता था। अदालत ने कहा कि केवल यह कहना कि सड़क पर खड़ा रहने का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं था, "अस्पष्ट" है, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि पुलिस उससे क्या जानना चाहती थी।

जज ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोपी ने अपने मुंह के चारों ओर रूमाल बांध रखा था, इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि वह अपनी पहचान छुपा रहा था। यह COVID का समय है और लोग सुरक्षा के उद्देश्य से मास्क पहनते हैं। यदि किसी के पास मास्क नहीं है तो वे रूमाल का उपयोग मास्क के रूप में करते हैं और यदि आरोपी अपने मुंह को ढकने के लिए रूमाल का उपयोग मास्क के रूप में कर रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपनी पहचान छुपा रहा है।

अंत में, पीठ ने कहा कि रात में 1.30 बजे सड़कों पर घूमना कोई अपराध नहीं है। तथ्य यह है कि आरोपी ने पूछताछ के दौरान पुलिस को अपना असली नाम बताया, जिससे उसका वास्तविक पता चला।

कोर्ट ने कहा कि इसलिए, अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के आधार पर मेरे विचार में यह मानना बहुत मुश्किल है कि आरोपी अपराध करने के लिए अपनी पहचान छुपा रहा था। इस प्रकार, अभियोजन उचित संदेह से परे आरोपी के अपराध को साबित करने में विफल रहा है।

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