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लाॅकडाउन के दौरान निखिल कुमारस्वामी के विवाह समारोह के लिए 90 लोगों को अनुमति कैसे दी गई? कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूछा

LiveLaw News Network
6 May 2020 2:33 PM GMT
लाॅकडाउन के दौरान निखिल कुमारस्वामी के विवाह समारोह के लिए 90 लोगों को अनुमति कैसे दी गई? कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूछा
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी के विवाह समारोह में शामिल होने वाले व्यक्तियों की संख्या पर कोई प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया था? यह शादी समारोह 17 अप्रैल को आयोजित किया गया था। जिसमें लगभग 80 से 90 लोगों ने भाग लिया था।

मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति बी.वी नागरथना की खंडपीठ ने कहा कि

''हम यह स्पष्ट करते हैं कि हम 17 अप्रैल को आयोजित हुए एक व्यक्तिगत समारोह के बारे में नहीं जानना चाहते हैं। परंतु हम राज्य सरकार से ऐसे कार्यों की अनुमति देने के विषय में सवाल कर रहे हैं, जो प्रथम दृष्टया लॉकडाउन लगाने और कई निषेधों को लागू करने के उद्देश्य को विफल कर सकते हैं।

यदि केंद्र सरकार और राज्य सरकार की नीति ऐसे विवाह कार्यों को आयोजित करने की अनुमति देती है, जिसमें 50 से अधिक व्यक्ति शामिल हो सकते हैं तो सरकार को इसका जवाब लिखित रूप में देना होगा ताकि सभी नागरिक उक्त सुविधा का लाभ उठा सकें।''

अदालत ने यह टिप्पणी राज्य सरकार की तरफ से दी गई दलीलों को सुनने के बाद की थी। राज्य की तरफ से बताया गया था कि

''समारोह के लिए अनुमति 16 अप्रैल को उपायुक्त, रामनगर जिला द्वारा दी गई थी। आयोजकों ने निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किये थे और उन्हें सख्त निर्देश दिया गया था कि केवल आमंत्रितों को ही आने की अनुमति दी जाए। यह सारी सुरक्षा डिप्टी एसपी रामनगर की देखरेख में सुनिश्चित की गई थी।

शादी समारोह में आने वाले सभी उपस्थित लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों की एक टीम तैनात की गई थी। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया था कि COVID 19 प्रोटोकॉल के अनुसार सभी को मास्क और सैनिटाइजर वितरित किए जाएं। इसके अलावा, विवाह स्थल पर भी पूरे बंदोबस्त किए गए थे और आम जनता को समारोह में शामिल होने की बिल्कुल अनुमति नहीं थी।''

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने गृह मंत्रालय के 15 अप्रैल के आदेश के एनेक्सचर खंड (4) पर भरोसा किया। इस क्लाज़ में '' COVID-19 प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय निर्देश'' थे।

खण्ड (4) शीर्षक ''पब्लिक स्पेस'' के तहत आता है, जिसमें बताया गया है कि ''विवाह और अंत्येष्टि जैसे कार्यक्रम जिला मजिस्ट्रेट द्वारा व्यवस्थित किए जाएंगे।''

हालांकि, पीठ ने कहा कि

''यह मानते हुए कि जिला मजिस्ट्रेट के पास 17 अप्रैल को विवाह समारोह आयोजित करने की अनुमति देने की शक्ति थी। हमें यह जानकर आश्चर्य हो रहा है कि उन्होंने विवाह समारोह में भाग लेने वाले मेहमानों की संख्या के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया था।''

अदालत ने 15 अप्रैल, 2020 और 1 मई, 2020 के आदेशों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार से नीतिगत बयान पूछा है। पूछा गया है कि क्या जिला मजिस्ट्रेटों के पास यह खुला अधिकार है कि वह विवाह समारोहों और अन्य समारोहों के आयोजन की अनुमति दे सकें, जबकि इन समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों की संख्या को निषिद्ध किया गया हैं?

कोर्ट ने अधिकारियों को 1 मई 2020 के आदेश के क्लाज़- I खंड (5) के बारे में याद दिलाया। जिसमें विशेष रूप से कहा गया है कि विवाह से संबंधित समारोहों में सामाजिक दूरी सुनिश्चित करनी होगी और अधिकतम मेहमानों की संख्या 50 से अधिक नहीं होनी चाहिए। वहीं 15 अप्रैल, 2020 की अधिसूचना के क्लाज़- I अनुसार ऐसी कोई छूट नहीं दी गई है, जिसके तहत 50 से अधिक मेहमानों की उपस्थिति की अनुमति दी जाए।

राज्य सरकार से यह भी पूछा गया है कि वह बताएं कि 17 अप्रैल, 2020 को आयोजित समारोह में अतिथियों को शामिल होने के लिए कितने वाहनों को अंतर जिला यात्रा के लिए मूवमेंट पास दिए गए थे। उनका पूरा ब्यौरा भी पेश किया जाए।

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