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'उम्मीद' है कि प्रशासन आवश्यक कदम उठाएगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर पोर्टल पर गड़बड़ियों को दूर करने की मांग वाली याचिका का निपटारा किया

LiveLaw News Network
17 Jan 2022 6:29 AM GMT
उम्मीद है कि प्रशासन आवश्यक कदम उठाएगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर पोर्टल पर गड़बड़ियों को दूर करने की मांग वाली याचिका का निपटारा किया
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राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर विभाग को अपने आधिकारिक पोर्टल पर सभी दोषों और गड़बड़ियों को दूर करने का निर्देश देने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से अनिच्छा व्यक्त की।

हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए प्रशासन पर अपने स्तर पर मुद्दों से निपटने का जिम्मा छोड़ दिया।

चीफ जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस रेखा बोराना की खंडपीठ ने कहा,

"इस स्तर पर हम इन मुद्दों से निपटने के लिए प्रशासन पर छोड़ देते हैं। हमें उम्मीद है कि अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना प्रशासन के स्तर पर ही शिकायतकर्ताओं की कठिनाइयों का उचित समाधान किया जाएगा।"

अदालत ने कहा कि इस संबंध में याचिकाकर्ताओं द्वारा की गई प्रार्थनाएं व्यापक हैं और विशिष्ट नहीं हैं। हालांकि, अदालत ने भविष्य में कठिनाइयां के बनी रहने पर शिकायतकर्ताओं के लिए एक उपयुक्त मंच के समक्ष इन मुद्दों को उठाने की स्वतंत्रता दी।

वर्तमान मामले में टैक्स बार एसोसिएशन, जोधपुर ने आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल के कारण शिकायतकर्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली विभिन्न कठिनाइयों का उल्लेख किया। इसमें विभिन्न गड़बड़ियां हैं।

याचिकाकर्ताओं द्वारा की गई प्राथमिक प्रार्थना सीबीडीटी को रिटर्न दाखिल करने और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 15 फरवरी, 2022 तक विस्तार के लिए निर्देश जारी करना था। हालांकि, सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता विकास बलिया ने अदालत को अवगत कराया कि शिकायतकर्ताओं की प्राथमिक शिकायत का समाधान कर दिया गया, क्योंकि भारत सरकार ने वर्ष 2021-22 में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथियां और मूल्यांकन के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट बढ़ा दी है।

याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा कि अनुपालन के लिए अंतिम तिथियों के बोर्ड में विस्तार किया गया है। अदालत ने देखा कि संभवतः ये एक्सटेंशन इसलिए दिए गए हैं, क्योंकि भारत सरकार ने महसूस किया कि तकनीकी कठिनाइयों के कारण कई शिकायतकर्ता अनुपालन करने की स्थिति में नहीं हो सकते।

अदालत ने यह भी कहा कि यह मानने के लिए कुछ भी नहीं है कि प्रशासन इस तरह के दोषों के लिए संज्ञेय नहीं लेगा। यह भी देखा गया कि ऐसे दोषों को दूर करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि अनुपालन के लिए अंतिम तिथि का विस्तार भ्रामक न रहे, लेकिन शिकायतकर्ता इस तरह के विस्तार का सार्थक लाभ उठा सकें।

केस शीर्षक: टैक्स बार एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य।

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