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"उसका बचपन छीन लिया गया '' : 14 साल की लड़की को देह व्यापार में धकेलने के आरोप में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीन महिलाओं को जमानत देने से इनकार किया

LiveLaw News Network
15 Nov 2020 9:33 AM GMT
उसका बचपन छीन लिया गया  : 14 साल की लड़की को देह व्यापार में धकेलने के आरोप में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीन महिलाओं को जमानत देने से इनकार किया
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में उन तीन महिलाओं को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिन पर वेश्यावृत्ति के जरिए पैसे कमाने और शादी के बहाने लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया गया है।

न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ तीन महिलाओं की तरफ से दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 370 (4), 363, 366-ए, 420, 120-बी, 34 ,पाॅक्सो एक्ट की 16/17 और इॅमारल ट्रैफिक (प्रीवेंशन) एक्ट 1956 की धारा 3,4,5,7 व 9 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

मामले के तथ्य

14 जुलाई 2020 को पुलिस ने छापा मारा था क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि आवेदक (कंचन मंडल, सोनम दुबे और राजकुमारी) वेश्यावृत्ति के जरिए पैसे कमाकर जीवन-यापन करती हैं। यह भी आरोप लगाया गया था कि वे वेश्यावृत्ति करके पैसा कमाती हैं और शादी के बहाने लोगों को ठगती हैं।

इसलिए एक नकली ग्राहक भेजा गया था और एक सौदा पक्का किया गया था। जिसके बाद आवेदकों को पैसा सौंप दिया गया था। निर्धारित समय पर, जब पुलिस पहुंची, तो उन्होंने सभी आवेदकों को एक 14 वर्ष की युवा लड़की के साथ गिरफ्तार कर लिया। इस लड़की को शादी के नाम पर बेचा जा रहा था, जिसके लिए 4 लाख रुपये में सौदा किया गया था।

युवा लड़की ने खुलासा किया कि सबसे पहले, पूजा नाम की एक महिला ने उसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया। तत्पश्चात, आवेदक राजकुमारी ने उसे देह व्यापार में धकेल दिया और उसके माता-पिता को पैसे दिए। उसके बाद आवेदक कंचन मंडल और राजकुमारी दोनों ने उसे वेश्यावृत्ति के लिए भेजा और इसके बदले व्यक्तियों पैसे लिए गए।

पीड़ित लड़की के अनुसार, वह इसके लिए सहमत नहीं थी, लेकिन उसे धमकी दी गई थी।

आवेदक कंचन के वकील ने कहा कि वह एक महिला है जो 50 साल की है और बीमार है, इसलिए वह जमानत की हकदार है।

आवेदक सोनम और राजकुमारी की ओर से यह कहा गया कि अभियोजन पक्ष ने आवेदकों की मंशा को साबित नहीं किया है कि उन्होंने यह कृत्य क्यों किया।

कोर्ट का आदेश

न्यायालय ने कहा कि,

''इरादा तब अपना महत्व खो देता है जब किया गया कृत्य स्पष्ट होता है। यहां एक ऐसा मामला है जहां जानकारी प्राप्त होने पर, आवेदकों के साथ एक सौदा तय किया गया था। उन्होंने पैसे और चेक भी लिया था। जिनके बदले वे 14 साल की एक युवा लड़की की सप्लाई कर रही थी।''

अदालत ने आगे कहा कि,

''इस युवा पीड़िता ने एक दयनीय कहानी सुनाई है। उसका बचपन छीन लिया गया। उसे पूजा नाम की एक महिला ने सबसे पहले देह व्यापार में धकेल दिया। उसके बाद आवेदक राजकुमारी ने और उसके बाद आवेदक मंडल और फिर आवेदक सोनम ने।''

न्यायालय ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि पीड़िता के जन्म की तारीख 17 फरवरी 2007 है। इस पर कोर्ट ने कहा,

''इसका मतलब है कि वह वास्तव में सिर्फ 13 साल की थी जब उसे बरामद किया गया था। जांच अधिकारी ने उन पुलिस अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए हैं जिन्होंने छापेमारी की। वहीं पीड़िता की मां का भी बयान दर्ज किया गया है। पीड़िता की मां के अनुसार, वह बहुत गरीब हैं और आवेदक कंचन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि पीड़िता एक कार्यालय में काम कर रही है। उसे नहीं पता था कि उसकी बेटी को आवेदक कंचन ने कहां रखा है।''

मामले में दी गई दलीलों और मामले के तथ्यों व परिस्थितियों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने कहा कि यह जमानत के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।

इसलिए, अदालत ने कहा, ''आवेदक जमानत पाने की हकदार नहीं हैं और इसलिए आवेदक कंचन मंडल, सोनम दुबे और राजकुमारी की तरफ से दायर जमानत याचिकाएं खारिज करने लायक हैं।''

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