"आरोपी विकृत मानसिकता का, इसने विपरीत लिंग की युवा मित्रों के जीवन को नर्क बना दिया", हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी की जमानत से इनकार किया

  • आरोपी विकृत मानसिकता का, इसने विपरीत लिंग की युवा मित्रों के जीवन को नर्क बना दिया, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी की जमानत से इनकार किया

    Himachal Pradesh High Court

    यह देखते हुए कि अभियुक्त का आचरण इतना "घृणित था कि उसने विपरीत लिंग की युवा मित्रों के जीवन को नर्क बना दिया,", हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने गुरुवार (6 मई) को एक ऐसे व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस ने कथित रूप से एक नाबालिग लड़की से बलात्कार किया था।

    जस्ट‌िस अनूप चितकारा की खंडपीठ ने कहा, "अभियुक्त विकृत मानसकिता का प्रतीत होता है और ऐसे अभियुक्त को जमानत देने का कोई सवाल ही नहीं है।"

    आरोप

    नाबालिग पीड़िता के बयान के अनुसार, 4 जुलाई, 2020 को, जब वह और उसका दोस्त संदीप बातचीत करने के लिए सड़क से 20-30 मीटर नीचे चल रहे थे, तभी 6 लड़के वहां आए और उनमें से एक (ए -2), जो पीड़िता का परिचित था, ने दोनों को थप्पड़ मार दिया।

    उसके बाद उल लड़कों ने पीड़िता को कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया और जब उन्होंने पीड़िता से कपड़े उतरवा लिए, तो ए-1 ने उसका नग्न वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

    इस बीच, दूसरे लड़के लगातार संदीप कुमार की पिटाई करते रहे और ए-1 ने पीड़िता को बांह से पकड़कर झाड़ियों में ले गया, जहां उसने उसके साथ बलात्कार किया।

    जब पीड़िता ने विरोध किया तो उसने उसे थप्पड़ मार दिया। इस बीच, अन्य लड़कों ने संदीप को पकड़ रखा था, ताकि वह उसे बचा न सके और बाद में, अभियुक्त ने पीड़िता को धमकी दी कि वह इस घटना के बारे में किसी को न बताए, अन्यथा वे उसका वीडियो वायरल कर देंगे।

    हालांकि, कुछ दिनों बाद, उसे पता चला कि उन्होंने वीडियो अपलोड किया था और फिर उसने पुलिस को सूचित किया, जिसके कारण तत्काल प्राथमिकी दर्ज की गई।

    प्रस्तुतियां

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि अपराध साबित होने से पहले याचिकाकर्ता को जेल में डालना, उसके और उसके परिवार के साथ घोर अन्याय होगा।

    इसके विपरीत, राज्य ने तर्क दिया कि पुलिस ने जमानत याचिकाकर्ता के खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटा लिए हैं और यह अपराध जघन्य है, आरोपी कानून का पालन करने वाले लोगों के लिए खतरा है, और जमानत समाज को एक गलत संदेश भेज सकती है।

    आदेश

    यह रेखांकित करते हुए कि आरोपी ने उसके पुरुष मित्र के साथ होने का फायदा उठाया और मुख्य आरोपी ने उसका बलात्कार किया और उन्होंने न केवल ऐसा किया, बल्‍कि वीडियो भी बनाया और इसे वायरल किया, अदालत ने आगे कहा

    "अभियुक्तों की आयु केवल 22 वर्ष है, यह देखते हुए, आरोपी/ याचिकाकर्ता बदली परिस्थितियों में या मामले की सुनवाई में देरी होने पर नई जमानत की अर्जी दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होगा।"

    अंत में, यह देखते हुए कि इस मामले में तथ्य और परिस्थितियां अजीब हैं, याचिकाकर्ता जमानत के लिए मामला बनाने में विफल रहा है। याचिकाकर्ता को नया जमानत आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका को खारिज कर दिया गया।

    संबंधित समाचारों में, यह देखते हुए कि "ना का मतलब ना" है, और कुछ पुरुषों के लिए इसे समझना मुश्किल हो गया है," हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बुधवार को 17 साल की किशोरी से बलात्कार के आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

    जस्टिस अनूप चितकारा की एकल पीठ ने कहा ,"ना का मतलब हां नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि लड़की शर्मीली है। इसका मतलब यह नहीं है कि लड़की आदमी को उसे मनाने के लिए कह रही है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसे लगातार उसका पीछा करना है। ना शब्द को किसी और स्पष्टीकरण या औचित्य की आवश्यकता नहीं है। यह वहीं समाप्त होता है, और आदमी को वहीं रुकना है। जैसा कि हो सकता है, पीड़िता ने, इस मामले में, आरोपी से, जब उसने उसे छूना शुरू किया तो ना कहा हो लेकिन उसने उसे छूना जारी रखा....."

    अदालत ने आगे तर्क दिया कि पीड़िता ने अपनी मां से उसके साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना को बताया जो " प्रथमदृष्टया घटना की वास्तविकता की ओर इशारा करता है।"

    केस टाइटिल- रोहित कुमार बनाम हिमाचल राज्य।

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