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FIR हिंसा के किसी भी कृत्य का खुलासा नहीं करती, पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए: मद्रास उच्च न्यायालय ने 2 CAA-NRC प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की

SPARSH UPADHYAY
25 Nov 2020 4:56 AM GMT
FIR हिंसा के किसी भी कृत्य का खुलासा नहीं करती, पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए: मद्रास उच्च न्यायालय ने 2 CAA-NRC प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की
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यह देखते हुए कि याचिकाकर्ताओं ने सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) में संशोधन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन/विरोध प्रदर्शन किया था, मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में सीएए-एनआरसी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दायर एफआईआर को रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति जे. निशा बानू की पीठ हेनरी टिपाग्ने और साथिक अली की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने अपने खिलाफ सीएए-एनआरसी में प्रदर्शन करने के चलते दर्ज एफआईआर को रद्द करने की प्रार्थना की थी।

न्यायालय ने समान निष्कर्षों के साथ दो अलग-अलग आदेश दिए और अवलोकन किया,

"हालांकि, प्रथम सूचना रिपोर्ट के पंजीकरण को सही ठहराने के लिए प्रथम दृष्टया सामग्री है, लेकिन इसकी निरंतरता आवश्यक नहीं है। इसकी वजह यह है कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।"

उनके खिलाफ दर्ज मामला

प्रथम सूचना रिपोर्ट का सार यह था कि 04.01.2020 को याचिकाकर्ताओं ने अन्य लोगों के साथ CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) और NRC (नेशनल रजिस्टर सिटिजनशिप) के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

प्रतिवादी का मामला यह था कि याचिकाकर्ताओं ने अपने कृत्यों से सार्वजनिक उपद्रव किया था। उन्होंने सामान्य यातायात के मुक्त प्रवाह के साथ हस्तक्षेप किया था।

न्यायालय का अवलोकन

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में टिप्पणी की,

"देश ने उक्त संशोधनों के खिलाफ लोगों के विभिन्न वर्गों द्वारा विरोध प्रदर्शन देखा था। चूंकि विरोध शांतिपूर्ण था और यहां तक ​​कि पहली सूचना रिपोर्ट में हिंसा या किसी अप्रिय घटना के होने का कोई भी खुलासा नहीं किया गया है, मेरा मानना ​​है कि अभियोजन का जारी रहना आवश्यक नहीं है।"

इसलिए, उनके खिलाफ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट को खारिज कर दिया गया। आपराधिक याचिका की अनुमति दी गई।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेश का लाभ केवल याचिकाकर्ता को ही नहीं बल्कि गैर-याचिकाकर्ता को भी मिलेगा।

गौरतलब है कि मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता हेनरी टिपाग्ने के खिलाफ सीएए-एनआरसी के खिलाफ एक अन्य दिन प्रदर्शन करने का आरोप भी था, और उस सम्बन्ध में एक अन्य एफआईआर दर्ज की गयी थी, जिसे भी अदालत ने एक अलग आदेश के माध्यम से रद्द कर दिया।

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