समीर वानखेड़े द्वारा की गई अवैधताओं को उजागर करना मानहानि नहीं: नवाब मलिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा

  • समीर वानखेड़े द्वारा की गई अवैधताओं को उजागर करना मानहानि नहीं: नवाब मलिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा

    महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक ने एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के पिता पर उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करके अपने बेटे की अवैधताओं को छिपाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।

    बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष अंतरिम राहत की याचिका का विरोध करते हुए मलिक ने समीर वानखेड़े के खिलाफ उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर सतर्कता जांच शुरू करने की सरकार की कार्रवाई का हवाला दिया।

    आगे कहा कि कैसे क्रूज शिप ड्रग केस, जिसमें आर्यन खान एक आरोपी है और अन्य मामलों को जबरन वसूली के आरोप सामने आने के बाद दिल्ली में एक एसआईटी को स्थानांतरित कर दिया गया है।

    ध्यानदेव वानखेड़े ने बाद में समीर वानखेड़े के जन्म प्रमाण पत्र को प्रकाशित करने के बाद मलिक को उनके और उनके परिवार के खिलाफ कुछ भी अपमानजनक प्रकाशित करने से रोकने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दरअसल, नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि समीर मुस्लिम धर्म में पैदा हुआ थे, लेकिन अनुसूचित जाति से होने का झूठा दावा करके सरकारी नौकरी हासिल की।

    उक्त प्रमाण पत्र में ध्यानदेव का नाम 'दाऊद' अंकित है।

    सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने वानखेड़े और मलिक के वकीलों को संक्षेप में सुना, मलिक को मंगलवार तक याचिका का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।

    मलिक ने अपने जवाब में कहा कि मामला स्पष्ट रूप से आईपीसी की धारा 499 के तहत मानहानि के अपवादों में से एक के अंतर्गत आता है। इसके अलावा बेकार के बयानों के अलावा, वानखेड़े जन्म प्रमाण पत्र का खंडन करने के लिए एक भी दस्तावेज पेश करने में असमर्थ हैं।

    मलिक ने आगे कहा,

    "उक्त प्रमाण पत्र एमसीजीएम द्वारा जारी किया गया है। मैं कहता हूं कि यदि एमसीजीएम द्वारा जारी किया गया उक्त जन्म प्रमाण पत्र गलत है, तो यह वादी या समीर वानखेड़े के लिए सुधारात्मक कदम उठाने और एमसीजीएम के साथ आगे बढ़ने के लिए है।"

    मंत्री ने दावा किया कि वानखेड़े ने तथ्यों और मनगढ़ंत कहानियों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और उनके खिलाफ आदेश प्राप्त करने का एक और कमजोर प्रयास किया, इसलिए मुकदमा खारिज करने योग्य है।

    मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं: मलिक

    मलिक का दावा है कि पिता ने अपने वयस्क बच्चों की ओर से राहत की मांग करते हुए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा दायर किया है, जिसके लिए वह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 1 नियम 8 के प्रावधानों के तहत अदालत की पूर्व अनुमति प्राप्त करने में विफल रहे हैं।

    ये प्रावधान प्रकृति में अनिवार्य हैं।

    उन्होंने कहा,

    "एक पक्षकार के लिए प्रतिनिधि सूट स्थापित करने के लिए चार आवश्यक शर्तें हैं, जो हैं- पक्षकार होने चाहिए, समान हित वाले, न्यायालय की आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई हो और सूट में रुचि रखने वाले सभी व्यक्तियों को नोटिस जारी किया गया हो।"

    परिवार के सदस्यों ने कोई कार्यवाही शुरू नहीं की है: मलिक

    मंत्री ने कहा है कि समीर वानखेड़े एक अधिकारी होने के नाते उनकी पत्नी क्रांति रेडकर, एक अभिनेत्री और ध्यानदेव की बेटी यास्मीन, एक वकील होने के नाते सभी को स्वतंत्र कार्यवाही शुरू करनी चाहिए, अगर उन्हें बदनाम किया गया है।

    मलिक का यह भी कहना है कि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कई दस्तावेजी सबूत पेश किए हैं जिनका ट्रायल के समय परीक्षण किया जाएगा।

    आगे कहा कि इसके अलावा वे यह दिखाने में विफल रहे हैं कि कैसे मलिक द्वारा दिए गए बयान और टिप्पणी ध्यानदेव के लिए अपमानजनक या मानहानिकारक हैं और न ही उन्होंने बयानों की सत्यता का कोई विशेष खंडन किया है.

    मलिक का कहना है कि राकांपा प्रवक्ता की हैसियत से उन्होंने समीर वानखेड़े द्वारा की गई अवैधताओं को उजागर करने की कोशिश की है, जो एक लोक सेवक भी हैं।

    मलिक ने कहा,

    "मैं कहता हूं कि अब विभिन्न जांच एजेंसियां वादी के बेटे द्वारा की गई अवैधताओं की जांच कर रही हैं, क्योंकि उन्हें जांच के लिए प्रथम दृष्टया सामग्री मिली है। मैं कहता हूं कि वादी वर्तमान मुकदमा दायर करके उसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कम करने की कोशिश कर रहा है जिसे प्रतिवादी जनता की भलाई के लिए उपयोग करता है। वर्तमान मुकदमा वादी के बेटे द्वारा की गई अवैधताओं को कवर करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है।"

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