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सरकार और एजुकेशन बोर्ड सुनिश्चित करें कि बच्‍चों का स्कूल बैग भारी न हो: केरल हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
3 Feb 2020 4:27 AM GMT
सरकार और एजुकेशन बोर्ड सुनिश्चित करें कि बच्‍चों का  स्कूल बैग भारी न हो: केरल हाईकोर्ट
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केरल हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सहित शैक्षिक प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे यह तय करें कि स्कूल बैग के वजन को कम करने के लिए जो आदेश पारित किए गए हैं, उन्हें सभी स्कूलों में अक्षरसः लागू किए जाएं।

चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चैली की बेंच ने अधिकारियों को समय-समय पर, नोटिस देकर या बिना नोटिस के, स्कूलों का निरीक्षण करने का आदेश भी दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोर्ट के आदेश संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्यान्वित किए गए हैं।

पीठ ने डॉ जॉनी साइरिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका में यह निर्देश जारी किया। याचिका में कहा गया था कि भारी स्कूली बैग बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि बच्‍चे रोज़ाना 10 से 30 किलोग्राम वजन के भारी स्कूल बैग ढोते हैं, जिससे वे विभिन्न बीमारियों के शिकार हो जाते हैं, जिनमें स्थायी या आं‌श‌िक विकलांगता भी शामिल हैं। साथ ही इनसे बच्चों को गंभीर मानसिक आघात भी होता है।

कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को यह तय करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि बच्चे के स्कूल बैग को वजन कम से कम किया जाए, ताकि उनका कल्याण, शारीरिक विकास और स्वास्थ्य सुनिश्‍चित हो और एक व्यवस्था सुनिश्चित हो, जहां बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान न हो। बेंच ने कहा कि हालांकि जारी किए गए दिशा-निर्देशों को न सुनिश्च‌ित किया जा रहा है और न अक्षरसः लागू नहीं किया जा है।

बेंच ने कहा-

"यह सुन‌िश्‍च‌ित किया जाना आवश्यक है कि बच्चों का पालन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बेहतर हालात में हो क्योंकि वे राष्ट्र के भविष्य हैं। यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है कि बच्‍चे इन मौलिक अधिकारों का अक्षरसः लाभ ले सकें।

मौलिक अधिकारों के मामले में, जहां तक ​​बच्चों का संबंध है, यह सुनिश्चित करना है कि वे सर्वोत्तम संभव तरीके से शिक्षा पाएं. साथ ही संविधान का अनुच्छेद 21, जो जीवन की सुरक्षा और व्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंध‌ित है, यह कल्पना करता है कि बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान हुए बिना अपने स्कूली जीवन का आनंद लें।

बच्चों पर डाला जाने वाला अनावश्यक बोझ, उन्हें जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करेगा, इसलिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सभी शैक्षिक एजेंसियों की जिम्मेदारी और कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि बच्चे को कम से कम वजन का स्कूल बैग दिया जाए।"

कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों के नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 को चौदह वर्ष की आयु तक के बच्चों की शिक्षा को विनियमित और सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

कोर्ट ने कहा:

"उक्त अधिनियम के लागू करने का उद्देश्य यह भी है कि बच्चे स्कूलों में स्वतंत्रता, खुशहाली के अपनी शिक्षा जारी रखें। उक्त उद्देश्यों को सुनिश्चित करने के लिए, यह आवश्यक है कि बच्चे खुशी के साथ खुशी के साथ स्कूल जाएं और शारीरिक और मानसिक संतुष्ट‌ि के साथ वापस आएं। उन्हें स्वास्थ्य या शिक्षा संबंध में कोई कष्ट न हो।"

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