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आवेदन करने की अंतिम तिथि तक पद के लिए पात्रता पूरी होनी चाहिए : पटना हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
10 March 2020 11:30 AM GMT
आवेदन करने की अंतिम तिथि तक पद के लिए पात्रता पूरी होनी चाहिए : पटना हाईकोर्ट
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पटना हाईकोर्ट ने चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष के चार छात्रों की तरफ से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सहायक अभियोजन अधिकारी के पद के लिए उनके आवेदन पर विचार करने की मांग की गई थी।

बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार, पद के लिए आवेदन करने वाले आवेदक इस आवेदन की अंतिम तिथि यानि 6 मार्च को लॉ ग्रेजुएट होना चाहिए।

छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर इस पद के लिए आवेदन करने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने दलील दी कि वे नियुक्ति के समय तक कानून के स्नातक होंगे। यह भी तर्क दिया गया था कि चूंकि प्रासंगिक सेवा नियम-बिहार अभियोजन नियमावली 2003 में कोई ऐसी शर्त नहीं थी कि आवेदक का आवेदन के समय लॉ ग्रेजुएट होना चाहिए, इसलिए विज्ञापन में ऐसी शर्त नहीं लगाई जा सकती है।

उन्होंने तर्क दिया कि न्यूनतम योग्यता ''नियुक्ति''के उद्देश्य के लिए है न कि ''आवेदन''के लिए।

लेकिन न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद ने भूपिंदरपाल सिंह व अन्य बनाम पंजाब राज्य व अन्य , (2000) 5 एससीसी 262 और राकेश कुमार शर्मा बनाम राज्य (एनसीटी ऑफ दिल्ली) व अन्य ( 2013) 11 एससीसी 58 मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों पर विश्वास जताते हुए इन तर्कों को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि पात्रता कब हासिल की जानी चाहिए, जब इसके बारे में नियम में कुछ नहीं कहा गया है तो आवेदक के पास यह पात्रता आवेदन की अंतिम तिथि के दिन तक होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि

''राकेश कुमार शर्मा (सुप्रा) के मामले में, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि निर्धारित कानूनी प्रस्ताव या कथन में कहा गया है कि चयन प्रक्रिया उस तिथि को शुरू हो जाती है जब आवेदन पत्र आमंत्रित किए जाते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि के दिन पात्र व्यक्ति को यह अधिकार प्राप्त होता है कि रिक्तियों के अनुसार उसके आवेदन पर विचार किया जाए, क्योंकि वह अपेक्षित योग्यताएं पूरी करता है।''

अदालत ने कहा कि निर्धारित कानूनी स्थिति को देखते हुए विज्ञापन में दी गई शर्तों या निर्देश को किसी भी तरह से गलत नहीं ठहराया जा सकता।

रिट याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने कहा

''याचिकाकर्ताओं के पास कोई योग्य दावा नहीं है क्योंकि यह स्वीकार की गई स्थिति है कि उन्हें अभी तक कानून स्नातक के रूप में अपनी योग्यता प्राप्त नहीं हुई है।''


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