दिल्ली दंगों में बब्बू की हत्या के मामले में 7 आरोपी बरी, निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के दोषी करार
Amir Ahmad
16 Oct 2026 5:18 PM IST

दिल्ली कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान ऑटो चालक बब्बू की हत्या के मामले में सात आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया। हालांकि, अदालत ने उन्हें निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस यह साबित करने में विफल रही कि आरोपियों ने बब्बू पर जानलेवा हमला किया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडीशनल सेशंस जज परवीन सिंह ने कुलदीप सिंह, हरजीत सिंह उर्फ हैप्पी, राहुल उर्फ अजय, सचिन रस्तोगी, भरत भूषण उर्फ लकी, संदीप उर्फ संजीव और धर्मेंद्र उर्फ धम्म को निषेधाज्ञा के उल्लंघन का दोषी ठहराया। यह निषेधाज्ञा दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 के तहत लागू की गई।
यह मामला खजूरी खास थाने में IPC की धाराओं 147, 148, 149, 188, 302, 153ए, 505, 120बी और 34 के तहत दर्ज किया गया। पिछले साल मार्च में सातों आरोपियों के खिलाफ हत्या के आरोप तय किए गए। उस समय अदालत ने मुस्लिम समुदाय की भीड़ का हिस्सा बताए गए 11 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया था।
अपने अंतिम आदेश में अदालत ने कहा कि बब्बू पर जानलेवा हमले के संबंध में अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से एक पुलिसकर्मी की गवाही पर आधारित था। इस पुलिसकर्मी ने दावा किया था कि अस्पताल से खजूरी चौक लौटने के बाद उसने लोगों के एक समूह को लाठियों से एक व्यक्ति की पिटाई करते देखा था।
हालांकि, अदालत ने घटना के समय और मृतक पर कथित हमले की परिस्थितियों को लेकर गवाहों के बयानों में विसंगतियां पाईं।
जज ने कहा कि मृतक को पीटते हुए देखने का दावा करने वाले सहायक उपनिरीक्षक (ASI) की गवाही ही इस संबंध में प्रमुख साक्ष्य है। बयान में मौजूद असंगतियों को देखते हुए उसकी गवाही की पुष्टि के लिए अन्य साक्ष्यों की आवश्यकता है।
अदालत ने यह भी पाया कि दिल्ली पुलिस की ओर से पेश किया गया वीडियो बेहद खराब गुणवत्ता का था, जिसके आधार पर उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान स्थापित नहीं की जा सकती थी। ऐसे में वीडियो के जरिए आरोपी राहुल उर्फ अजय की पहचान करने संबंधी गवाही को अदालत ने भरोसेमंद नहीं माना। साथ ही, अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर सका कि वीडियो में जिस व्यक्ति को पीटते हुए दिखाया गया, वह बब्बू ही था।
इन परिस्थितियों में अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि हत्या के आरोप को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं थे। अदालत ने सातों आरोपियों को IPC की धारा 148 के साथ धारा 149 के तहत लगाए गए आरोपों से भी बरी कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे साबित हो कि आरोपियों में से कोई भी घातक हथियार या कोई अन्य हथियार लेकर चल रहा था।
IPC की धारा 153ए के तहत लगाए गए आरोप पर अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई विशिष्ट कृत्य साबित नहीं कर पाया, जिसे आरोपियों में से किसी व्यक्ति या पूरे समूह से जोड़कर इस अपराध के आवश्यक तत्वों को पूरा किया जा सके।
अदालत के अनुसार यह भी स्थापित नहीं हुआ कि आरोपी उस भीड़ का हिस्सा थे, जिसने बब्बू पर जानलेवा हमला किया।
हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि सातों आरोपी 25 फरवरी 2020 को खजूरी चौक पर मौजूद थे और उस समय लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर रहे थे। इसी आधार पर उन्हें IPC की धारा 188 के तहत दोषी ठहराया गया।
इस मामले में मुकदमे का सामना करने वाले एक अन्य आरोपी सचिन गुप्ता उर्फ मोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
मामले के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान खजूरी चौक पर ऑटो चालक बब्बू घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले जाया गया, जहां 27 फरवरी 2020 को उनकी मौत हो गई थी।

